संपादक: दविंदर कुमार
Banner

करुणा वह शक्ति है जो दया को उपचार और समझ को आशा में बदल देती है।

— पैग़ाम-ऐ-जगत
AUG 19 2026
Article Image

ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर और विकास की नई जरूरतें

भारत की तरक्की की तस्वीर अक्सर बड़े शहरों, नई सड़कों, औद्योगिक केंद्रों, ऊंची इमारतों और डिजिटल सुविधाओं के साथ जोड़ कर देखी जाती है। पर भारत की एक बड़ी हकीकत अभी भी गांवों में बसती है। यहां रहने वाले लोग भी वही सुविधाएं, मौके और जीवन की गुणवत्ता चाहते हैं जो शहरों में आम होते जा रहे हैं। इसलिए ग्रामीण विकास का अर्थ अब सिर्फ खेतीबाड़ी या एक गांव को दूसरे गांव से जोड़ने वाली सड़क नहीं रह गया। यह शिक्षा, सेहत, रोजगार, आवाजाही, इंटरनेट, बाजार और बेहतर जीवन से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।

Read More
AUG 06 2026
Article Image

मजबूत स्थानीय सरकारें देश की तरक्की का आधार

किसी भी देश की तरक्की का असली अंदाजा उसके बड़े महानगरों से नहीं, बल्कि उसके शहरों, कस्बों और गांवों की हालत से लगाया जाता है। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी सबसे बुनियादी सुविधाएं, सड़कें, सीवरेज, पीने का पानी, स्ट्रीट लाइटें, सफाई, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं, की जिम्मेदारी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के सिर होती है। यदि ये संस्थाएं ही वित्तीय और प्रशासनिक रूप से कमजोर हों तो विकास की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।

Read More
JUL 30 2026
Article Image

ट्राइसिटी के बुनियादी ढांचे की हकीकत

किसी भी शहर की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों, आईटी पार्कों, शॉपिंग मॉल या नई रिहायशी टाउनशिप से नहीं बनती। एक शहर तब शहर कहलाता है जब उसके बुनियादी ढांचे पर लोग हर रोज भरोसा कर सकें। भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, सुचारू सीवरेज और ड्रेनेज प्रणाली, समय पर कूड़ा निपटारा, गड्ढों से मुक्त सड़कें, सुव्यवस्थित आवाजाही और बरसात के वक्त भी आम जिंदगी को बिना रुकावट जारी रखने की क्षमता ही किसी शहर के विकास का असली पैमाना होती है। इस हफ्ते चंडीगढ़ ट्राइसिटी क्षेत्र, खासकर चंडीगढ़, मोहाली और आसपास के इलाकों में हुई बारिश ने एक बार फिर इस पैमाने की असली तस्वीर सामने रख दी।

Read More
JUL 22 2026
Article Image

विरोध प्रदर्शन, नैरेटिव की जंग और लोकतंत्र की कसौटी

दिल्ली के जंतर-मंतर में इस हफ्ते हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला खड़ा किया है कि आज के लोकतंत्र में प्रदर्शनों का असल अर्थ क्या रह गया है। किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में नागरिकों को अपनी असहमति प्रकट करने का अधिकार होता है। यह अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी पहचान है। पर आज प्रदर्शन सिर्फ सड़कों या मैदानों तक सीमित नहीं रहे। यह एक ही समय में मीडिया, सोशल मीडिया, राजनीतिक मंचों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी लड़े जाते हैं। इस कारण आज के विरोध प्रदर्शन केवल मांगों या मुद्दों की लड़ाई नहीं रहे, बल्कि यह "नैरेटिव" की लड़ाई भी बन चुके हैं।

Read More
JUL 16 2026
Article Image

जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता बोझ: इलाज नहीं, बचाव बने पहली प्राथमिकता

भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों के दौरान काफी तरक्की की है। आधुनिक इलाज, नई तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने लोगों की औसत उम्र में वृद्धि की है। लेकिन इस प्रगति के साथ-साथ एक ऐसी चुनौती भी तेजी से बढ़ रही है, जो हमारी रोजमर्रा की आदतों के कारण धीरे-धीरे शरीर को अपनी चपेट में ले लेती है। मधुमेह (शुगर), मोटापा, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), दिल की बीमारियां, मानसिक तनाव और डिप्रेशन जैसी जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां आज देश के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही हैं। चिंता की बात यह है कि अब ये बीमारियां केवल बड़ी उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही हैं।

Read More
JUL 08 2026
Article Image

सड़क सुरक्षा केवल सख्त कानूनों से नहीं, नैतिक जिम्मेदारी से सुनिश्चित होगी

भारत में हर महीने हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा बैठते हैं, जबकि लाखों लोग गंभीर चोटों और स्थायी अपंगता का शिकार होते हैं। सरकारों ने ट्रैफिक नियम सख्त किए, जुर्माने बढ़ाए और निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने की कोशिश की है। फिर भी हादसों की संख्या में उम्मीद के अनुसार कमी नहीं आई। इसका सीधा मतलब है कि सड़क सुरक्षा केवल कानून सख्त करने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए बुनियादी ढांचे, ड्राइवर प्रशिक्षण, वाहनों की सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, प्रभावी कार्यान्वयन और लोक-केंद्रित परिवहन नीतियों पर समान ध्यान देना होगा।

Read More
JUL 02 2026
Article Image

बदलते समय में पारिवारिक संबंध: अपेक्षाओं, समझ और व्यक्तित्व के विकास की यात्रा

परिवार मानव जीवन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण संस्था होती है। यहीं पर मनुष्य प्रेम, सहयोग, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के अर्थ सीखता है। पारिवारिक संबंध केवल साथ रहने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे मनुष्य के स्वभाव, सोच और व्यक्तित्व को गढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ ये संबंध बदलते भी रहते हैं। यदि पिछली पीढ़ियों से लेकर आज तक के समय को देखा जाए, तो पारिवारिक संबंधों के तरीकों, अपेक्षाओं और भूमिकाओं में कई परिवर्तन दिखाई देते हैं।

Read More
JUN 18 2026
Article Image

सोशल मीडिया के युग में अफवाहों का खतरा

सूचना और तकनीक के इस युग में सोशल मीडिया मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे माध्यमों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान को बहुत आसान और तेज बना दिया है। आज कोई भी घटना घटने के कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है। यह तकनीक जहाँ लोगों को जोड़ने, ज्ञान बढ़ाने और जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण साधन बनी है, वहीं इसके साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ा हुआ है—अफवाहों और गलत जानकारी का बेरोकटोक प्रसार।

Read More
JUN 03 2026
Article Image

पहाड़ों में ट्रैफिक जाम का संकट

पहाड़ हमेशा से प्रकृति की शांति, सुंदरता और सादगी के प्रतीक रहे हैं। लोग शहरों की भाग-दौड़, प्रदूषण और भीड़-भाड़ से बचने के लिए पहाड़ों की ओर जाते हैं। लेकिन आज हालात इतने बदल चुके हैं कि कई पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों को प्रकृति से अधिक ट्रैफिक जाम के दर्शन होते हैं। कई बार सड़कों पर 8 से 10 घंटों तक वाहनों की कतारें लगी रहती हैं। प्रकृति की गोद में सुकून खोजने निकले लोग अपना अधिकांश समय जाम में फंसे रहकर बिताते हैं। यह सिर्फ यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विकास और पर्यटन को लेकर अधिक दूरदर्शिता और योजनाबद्ध सोच की आवश्यकता है।

Read More
MAY 28 2026
Article Image

गायब होती प्राकृतिक छांव

यह एक बड़ी विडंबना है कि हमारे शहर जितने आधुनिक होते जा रहे हैं, उनमें मनुष्यों के लिए आराम से रहना उतना ही मुश्किल होता जा रहा है। दोपहर के समय सड़कें आग की तरह तपती हैं, कंक्रीट की दीवारें शाम होने के बाद भी गर्मी छोड़ती रहती हैं और घर से बाहर निकलना एक आम बात के बजाय सहनशक्ति की परीक्षा जैसा लगने लगा है। शहर ऐसे स्थान बनते जा रहे हैं जहाँ मानवीय जीवन और सुख-सुविधा धीरे-धीरे पीछे छूट रही है। गर्मियों में तापमान के लगातार बढ़ने के साथ-साथ बिजली की लोड-शेडिंग (कटौती) ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। कई इलाकों में घर गर्मी के ऐसे जाल बन जाते हैं जहाँ न ठीक से हवा आती है, न छांव मिलती है और न ही आराम। प्राकृतिक छांव और पेड़ों की कमी के कारण लोग पूरी तरह से एयर कंडीशनर और पंखों पर निर्भर हो रहे हैं, लेकिन जब बिजली ही न हो तो यह सारी सहूलियत बेअसर हो जाती है।

Read More
MAY 21 2026
Article Image

बदलते आर्थिक हालात और बढ़ती लागत

पिछले कुछ वर्षों में आम लोगों की जिंदगी में एक ऐसा बदलाव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया है, जिसकी चर्चा लगभग हर घर में होती है—रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी। घरेलू खर्चे, जिन्हें कभी एक निश्चित आय के भीतर आसानी से संभाला जा सकता था, अब कई परिवारों के लिए योजना और सावधानी की मांग करते हैं। रसोई का खर्च, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन, मकान का किराया, बिजली-पानी के बिल और अन्य जरूरी जरूरतों का खर्च बढ़ने के कारण लोग अपने मासिक बजट को नए तरीके से देखने के लिए मजबूर हुए हैं।

Read More
MAY 14 2026
Article Image

नीट पेपर लीक: केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के भविष्य का सवाल

नीट पेपर लीक का मामला केवल एक प्रतियोगी परीक्षा में हुई गड़बड़ी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों युवाओं की मेहनत, उनके भविष्य और पूरी व्यवस्था पर विश्वास से जुड़ा एक गंभीर सवाल है। जब किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं, तो उसका प्रभाव केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उन विद्यार्थियों के मनोबल पर भी पड़ता है जो वर्षों तक अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा एक सपने को पूरा करने के लिए समर्पित करते हैं। देशभर में लाखों विद्यार्थी डॉक्टर बनने की आशा के साथ कड़ी मेहनत करते हैं।

Read More
MAY 06 2026
Article Image

बदलते पारिवारिक ढांचे के साथ उभरती चुनौतियां

पारिवारिक जीवन कभी भी एक जैसा नहीं रहता। समय के साथ घरों की बनावट, सोच-विचार और उम्मीदें लगातार बदलती रहती हैं। सामाजिक बदलाव, आर्थिक दबाव, शिक्षा का प्रसार और नई विचारधाराओं से घर के माहौल को नया रूप मिलता है। जो जीवनशैली पहले स्थिर मानी जाती थी, वह निरंतर बदल रही है। यह बदलाव कई मायनों में प्रगति का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं, खासकर यह कि घर के सदस्य आपस में कैसे बातचीत करते हैं, असहमतियों को कैसे सुलझाते हैं और अगली पीढ़ी के लिए कैसा माहौल तैयार करते हैं।

Read More
APR 16 2026
Article Image

कौशल भारत की चुनौती: नौकरियों की कमी

भारत में पिछले कुछ वर्षों से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि युवा न केवल शिक्षित रहें, बल्कि वे ऐसे हुनर भी सीखें जो उन्हें रोज़गार के योग्य बनाएं। कागज़ों पर यह प्रयास काफी सफल दिखाई देता है क्योंकि हर साल हज़ारों छात्र प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और प्रमाण पत्र लेते हैं। लेकिन जब हम इसे ज़मीनी हकीकत से जोड़कर देखते हैं, तो एक बड़ी उलझन सामने आती है: कौशल तो मिल रहा है, पर नौकरियां अभी भी कम हैं। व्यापारिक नज़रिए से देखा जाए तो उद्योगों को ऐसे कर्मचारियों की ज़रूरत है जो तुरंत काम में योगदान दे सकें।

Read More
APR 09 2026
Article Image

बढ़ता ट्रैफिक और प्रदूषण: शहरों के लिए एक चुनौती

आज के तेजी से बदलते शहरी जीवन में ट्रैफिक जाम और बढ़ता प्रदूषण ऐसी हकीकत बन चुके हैं, जिनसे लगभग हर नागरिक रोजाना रूबरू होता है। सुबह दफ्तर या स्कूल जाते समय सड़कों पर वाहनों की लंबी लाइन, हॉर्न की लगातार गूंज और हवा में मिला हुआ धुआं एक आम दृश्य बन गया है। शाम के वक्त यह हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब वापसी करते वाहनों की भीड़ से सड़कें भर जाती हैं। यह दृश्य सिर्फ किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े और छोटे दोनों तरह के शहरों में नजर आता है। यह समस्या धीरे-धीरे बनी है, जिसमें हमारी जीवन शैली, आर्थिक विकास और योजना बनाने के तरीके सभी शामिल हैं।

Read More
APR 02 2026
Article Image

बुज़ुर्गों का सम्मान: एक संवेदनशील समाज की सच्ची पहचान

किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों की ऊँचाई या तकनीकी प्रगति से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने बुज़ुर्गों के साथ कितना आदर और सम्मान से पेश आता है। बुज़ुर्ग केवल अपने परिवारों के ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के मार्गदर्शक होते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि आज के तेज़ी से बदलते समय में उनकी यह महत्वपूर्ण भूमिका धीरे-धीरे कम होती जा रही है और उनकी गरिमा को भी नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

Read More
MAR 28 2026
Article Image

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना का इतिहास

हिमाचल प्रदेश का ऊना जिला ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा है। यह क्षेत्र प्राचीन समय से ही पंजाब और पहाड़ी संस्कृति के संगम का केंद्र रहा है। स्वां (Swan) नदी के किनारे बसा ऊना, व्यापार, आस्था और शासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

Read More
MAR 25 2026
Article Image

ईंधन पर कर: आय का साधन या जनता पर बोझ

ईंधन पर लगने वाला कर लंबे समय से सरकारों के लिए आय इकट्ठा करने का सबसे आसान और भरोसेमंद साधन रहा है। पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी जैसे उत्पादों पर कर लगाना आसान है, क्योंकि इनकी खपत व्यापक है। विकासशील देशों में, जहाँ सरकारी खर्चे—जैसे बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक भलाई—लगातार बढ़ रहे हैं, ईंधन कर एक मुख्य आय स्रोत बन जाता है। पर आज के बदलते आर्थिक और वैश्विक हालात में यह सवाल उठता है कि क्या यह कर वाजिब हदों में है या यह आम लोगों के लिए बोझ बन चुका है?

Read More
MAR 19 2026
Article Image

विश्व में शांति की आवश्यकता

हर सदी में मानवता ने संघर्ष के परिणामों का सामना किया है। युद्धों ने सीमाओं को बदला है, राजनीति को प्रभावित किया है और समाजों पर गहरे घाव छोड़े हैं। आज का संसार पहले की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से परस्पर जुड़ा हुआ है। किसी एक क्षेत्र में होने वाली घटना का प्रभाव बहुत तेज़ी से दूर-दूर तक फैलता है और हजारों मील दूर रहने वाले लोगों के जीवन को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में शांति एक साझा वैश्विक चिंता बन चुकी है, जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी को भी प्रभावित करती है।

Read More
MAR 12 2026
Article Image

बदलते समय में पारिवारिक संबंध: अपेक्षाओं, समझ और व्यक्तित्व के विकास की यात्रा

परिवार मानव जीवन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण संस्था होती है। यहीं पर मनुष्य प्रेम, सहयोग, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के अर्थ सीखता है। पारिवारिक संबंध केवल साथ रहने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे मनुष्य के स्वभाव, सोच और व्यक्तित्व को गढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ ये संबंध बदलते भी रहते हैं। यदि पिछली पीढ़ियों से लेकर आज तक के समय को देखा जाए, तो पारिवारिक संबंधों के तरीकों, अपेक्षाओं और भूमिकाओं में कई परिवर्तन दिखाई देते हैं।

Read More
_Footer