लिवासा अस्पताल ने वृद्ध महिला को दिया नया जीवन
अमृतसर:- सक्रिय प्लाज्मा सेल कैंसर-सिम्पटोमैटिक मल्टिपल मायलोमा- से पीड़ित 72 वर्षीय महिला को लिवासा अस्पताल, अमृतसर में इंडिविजुअलाइज्ड उपचार मिलने के बाद नया जीवन मिला है। इलाज के बाद मरीज के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
लिवासा अस्पताल के कंसल्टेंट-मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट एवं हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमृतजोत सिंह रंधावा ने बताया कि मरीज को मल्टिपल मायलोमा के गंभीर रूप के साथ-साथ अत्यधिक एनीमिया और किडनी की खराबी की शिकायत थी।
आगे की जांचों में सामने आया कि मरीज के बोन मैरो की लगभग 81% कोशिकाएं असामान्य प्लाज्मा कोशिकाएं थीं। उनका लैम्ब्डा फ्री लाइट-चेन स्तर बेहद बढ़ा हुआ था, जो बीमारी के अत्यधिक सक्रिय होने का संकेत था। जेनेटिक टेस्टिंग से भी असामान्यताओं का पता चला, जिन्हें अधिक आक्रामक मल्टिपल मायलोमा से जोड़कर देखा जाता है।
बीमारी की गंभीरता और किडनी के प्रभाव को देखते हुए बोर्टेज़ोमिब, साइक्लोफॉस्फेमाईड और डेक्सामेथासोन के साथ इलाज शुरू किया गया। बोर्टेज़ोमिब-आधारित यह उपचार बीमारी को तेजी से नियंत्रित करने और किडनी के कार्य में सुधार लाने में मददगार साबित होता है।
मरीज ने केवल दो साइकिलों के भीतर ही बेहतरीन सुधार दिखाया; उनके समग्र स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ और किडनी के कार्य में भी उल्लेखनीय रिकवरी देखी गई।
डॉ. अमृतजोत सिंह रंधावा ने कहा, "कैंसर का इलाज हमेशा सबसे नई या सबसे महंगी दवा चुनने के बारे में नहीं होता। सही इलाज वह है जो वैज्ञानिक रूप से सटीक, प्रभावी और मरीज के लिए सुलभ हो। वित्तीय स्थितियां भी कई परिवारों के लिए एक वास्तविकता होती हैं, और मरीजों को यह नहीं महसूस होना चाहिए कि प्रभावी इलाज उनकी पहुंच से बाहर है केवल इसलिए कि वे महंगी नई दवाएं नहीं खरीद सकते।"
