रतिया, 5 अक्तूबर (एडवोकेट गुरप्रीत सिंह मंडेर):- जेलों में बंद सिखों की रिहाई की मांग को लेकर शहर में एक विशाल रोष प्रदर्शन निकाला गया। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जत्थेदार जगदीश सिंह झिंडा ने इस रोष प्रदर्शन में भाग लिया।
यह रोष प्रदर्शन हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के सदस्यों जत्थेदार काका सिंह लधुवास, जत्थेदार गुरमेल सिंह सहिनाल, जत्थेदार इकबाल सिंह खोखर और जत्थेदार करमजीत सिंह फतेहाबाद, प्रबंधक दलजीत सिंह सहित क्षेत्र की संगत के सहयोग से निकाला गया।
विभिन्न संगठनों, संतों और क्षेत्र की सिख संगतों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। इस अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की पूर्व सदस्य बीबी अमरजीत कौर भी विशेष रूप से उपस्थित थीं।
इस अवसर पर जत्थेदार जगदीश सिंह झिंडा और उपस्थित सदस्यों ने एस.डी.एम. रतिया के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को जेल में बंद सिखों की रिहाई के संबंध में ज्ञापन सौंपा।
सभा को संबोधित करते हुए जत्थेदार जगदीश सिंह झिंडा ने कहा कि सरकारों को सिखों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी सजा पूरी कर चुके जेल में बंद सिखों की रिहाई के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिख समुदाय लंबे समय से जेल में बंद सिखों की रिहाई की मांग कर रहा है। भाई जगतार सिंह हावारा की माताजी के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने मांग की है कि भाई हावारा को कुछ दिनों के लिए पैरोल दी जाए, ताकि वे अपनी माताजी से मिल सकें।
सरकार को मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। जत्थेदार झींडा ने कहा कि सरकार को कैदियों की रिहाई के संबंध में सिख समुदाय की भावनाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जिन कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है, उनकी रिहाई के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
विरोध मार्च के दौरान सिख समुदाय ने कैदियों की रिहाई के पक्ष में आवाज उठाई और सरकार से इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने की मांग की।
इस रोष मार्च के दौरान बार एसोसिएशन रतिया ने प्रधान महेश तनेजा के नेतृत्व में समर्थन दिया। इस अवसर पर बाबा कश्मीरा सिंह, बाबा हरप्रीत सिंह, हरियाणा ग्रंथी सभा के प्रधान हाकम सिंह, जरनैल सिंह, सतनाम सिंह, कश्मीर सिंह, मनजीत सिंह, अजैब सिंह मंडेर सहित विभिन्न धार्मिक संस्थाओं, निहंग सिंह जत्थेबंदियों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सिख संगत मौजूद रही।
