चंडीगढ़, 5 अक्तूबर(हरमिंदर नागपाल) पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि देश के शहरों को स्वच्छ, हरित, सुरक्षित, समावेशी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मजबूत नगर निकाय, सशक्त मेयर, पर्याप्त संसाधन, आधुनिक तकनीक और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दिया।
कटारिया सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित 118वीं अखिल भारतीय मेयर परिषद में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। देशभर से पहुंचे मेयरों और प्रतिनिधियों ने इस दौरान शहरी विकास से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों, सफल प्रयोगों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर चर्चा की।
स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए अनुभव साझा करने की जरूरत
प्रशासक ने कहा कि अखिल भारतीय मेयर परिषद की सबसे बड़ी ताकत सामूहिक विचार-विमर्श और अनुभवों का आदान-प्रदान है। विभिन्न शहरों में स्वच्छता, पेयजल, सीवरेज, यातायात, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण, हरित क्षेत्र, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, शहरी गरीबों के कल्याण और डिजिटल सेवाओं जैसी समान चुनौतियां हैं। ऐसे में एक शहर में सफल मॉडल को दूसरे शहरों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय मेयर परिषद की स्थापना वर्ष 1962 में शहरी प्रशासन को मजबूत करने और देश के मेयरों को साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।
कटारिया ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को कानून के दायरे में रहते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। नगर निगमों और स्थानीय निकायों के कामकाज में संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और जनकल्याण की भावना जरूरी है। मेयरों को नागरिकों से लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करने चाहिए।
चंडीगढ़ को बताया नियोजित शहरी विकास का उदाहरण
प्रशासक ने चंडीगढ़ के वर्ष 1952 में स्थापना के बाद हुए विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर नियोजित शहरी विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है। नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता, जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने चंडीगढ़ की इलेक्ट्रिक वाहन नीति और ऊर्जा संरक्षण की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ केंद्र शासित प्रदेश और सबसे अधिक ईवी-तैयार शहर के रूप में पहचान मिली है। इसके अलावा राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2025 में चंडीगढ़ ने पहला स्थान प्राप्त किया है। शहर के सभी सरकारी भवनों पर 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा कवरेज हासिल करने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
कटारिया ने सुपर स्वच्छ लीग में चंडीगढ़ के दूसरे स्थान, डड्डूमाजरा कचरा प्रबंधन परियोजना और संपीड़ित जैव गैस संयंत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर पुनर्वास और किफायती आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों के चलते चंडीगढ़ देश का पहला झुग्गी-मुक्त शहर बना।
उन्होंने बताया कि पौधरोपण और जनभागीदारी के साथ प्रशासनिक प्रयासों से चंडीगढ़ का हरित क्षेत्र बढ़कर 51 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने नागरिकों से लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण करने की अपील की।
मेयरों के लिए पांच वर्ष का समान कार्यकाल और अधिक अधिकार की मांग
अखिल भारतीय मेयर परिषद की अध्यक्ष रेणु बाला गुप्ता ने देशभर में मेयरों की भूमिका और कार्यप्रणाली पर अपने विचार रखे। उन्होंने चंडीगढ़ को देश के सबसे सुंदर और सुनियोजित शहरों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में मेयरों की भूमिका और जिम्मेदारियों को मजबूत करने, उनके अधिकार बढ़ाने और पूरे देश में समान कार्यकाल सुनिश्चित करने पर विचार किया गया। उन्होंने 74वें संविधान संशोधन को पूरी प्रभावशीलता के साथ लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुप्ता ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियां अलग हैं, जिसके कारण नागरिक सेवाओं की व्यवस्था में भी अंतर दिखाई देता है। उन्होंने मेयरों के कार्यकाल, भूमिका, जिम्मेदारियों, अधिकारों और चयन प्रक्रिया में एकरूपता की वकालत की। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय मेयर परिषद समय-समय पर मेयरों के लिए प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण और ज्ञान-विनिमय कार्यक्रम आयोजित करती है।
मेयरों का पांच साल का कार्यकाल हो : नवीन जैन
राज्यसभा सदस्य एवं अखिल भारतीय मेयर परिषद के क्षेत्रीय प्रमुख नवीन जैन ने देशभर में मेयरों के लिए समान पांच वर्ष का कार्यकाल निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मेयरों की भूमिका, जिम्मेदारियां और अधिकार भी स्पष्ट एवं समान होने चाहिए।
उन्होंने 74वें संविधान संशोधन के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे शहरी स्थानीय निकायों को वास्तविक रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा और मेयर शहरी शासन व्यवस्था के मजबूत स्तंभ के रूप में कार्य कर सकेंगे।
सात मेयरों से शुरू हुई परिषद अब 266 तक पहुंची
अखिल भारतीय मेयर परिषद के महासचिव आशुतोष वार्ष्णेय ने बताया कि परिषद की शुरुआत केवल सात मेयरों से हुई थी, जबकि अब देशभर के 266 मेयर इससे जुड़े हैं।
उन्होंने मेयरों को सांसदों और विधायकों की तर्ज पर पेंशन संबंधी लाभ देने की मांग भी उठाई। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय मेयर परिषद हर वर्ष देश के अलग-अलग स्थानों पर चार बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों में मेयर अपने अनुभव साझा करते हैं और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
सौरभ जोशी ने मेयरों के अधिकार और कार्यकाल में एकरूपता पर दिया जोर
चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में मेयरों के कार्यकाल, अधिकार और चयन प्रक्रिया में काफी अंतर है। कहीं मेयर का कार्यकाल एक वर्ष, कहीं दो वर्ष, ढाई वर्ष और कहीं पांच वर्ष तक है।
उन्होंने कहा कि देशभर में मेयरों के चयन के लिए पारदर्शी और एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। कुछ राज्यों में मेयरों का चुनाव सीधे जनता करती है, जबकि कई राज्यों में निर्वाचित पार्षद मेयर का चुनाव करते हैं।
जोशी ने कहा कि मेयरों के कार्यकाल, अधिकारों, जिम्मेदारियों और संस्थागत व्यवस्था में एकरूपता आने से शहरी स्थानीय शासन मजबूत होगा और बढ़ती शहरी जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
चंडीगढ़ में ठोस कचरे की 100 प्रतिशत प्रसंस्करण क्षमता
चंडीगढ़ नगर निगम के आयुक्त अमित कुमार, आईएएस ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सम्मेलन में शामिल मुख्य अतिथि, मेयरों और प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने चंडीगढ़ की वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि नगर निगम ने नगर ठोस कचरे के लिए 100 प्रतिशत प्रसंस्करण क्षमता हासिल कर ली है।
उन्होंने बताया कि स्वच्छता और विकास से जुड़े मानकों में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर चंडीगढ़ को प्रगति शहर-50 पहल के लिए चुना गया है।
आयुक्त ने नशा मुक्त अभियान के तहत चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशे से जुड़े मामलों में शामिल लोगों की संपत्तियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य शहर को सुरक्षित, स्वस्थ और जिम्मेदार शहरी वातावरण उपलब्ध कराना है।मेयरों ने चंडीगढ़ की प्रमुख परियोजनाओं का किया दौरा
सम्मेलन के बाद देशभर से आए मेयरों ने चंडीगढ़ नगर निगम की विभिन्न परियोजनाओं और सफल कार्यप्रणालियों का दौरा किया। इनमें एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी), रोज गार्डन, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, एयर म्यूजियम, रॉक गार्डन और सुखना झील शामिल रहे।
मेयरों ने चंडीगढ़ नगर निगम की विभिन्न पहलों और शहरी विकास मॉडल की सराहना की। इस अवसर पर रोज गार्डन के निकट अंडरपास के पास मेयरों ने फूलदार पौधे भी लगाए।
सम्मेलन में पूर्व सांसद किरण खेर, अखिल भारतीय मेयर परिषद के सचिव मनोज गुप्ता, पंचकूला के मेयर श्याम लाल बंसल, मोहाली के मेयर सरबजीत सिंह समाना, अंबाला की मेयर अक्षिता सैनी, फरीदाबाद की मेयर परवीन बत्रा जोशी, करनाल की मेयर एवं परिषद अध्यक्ष रेणु बाला गुप्ता सहित देश के विभिन्न शहरों के मेयर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे
