चंडीगढ़, 5 अक्तूबर 2026 (हरमिंदर सिंह नागपाल):- सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों के चौथे बैच के लिए आपदा तैयारी एवं प्रतिक्रिया (डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस एंड रिस्पांस) पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एम.जी.एस.आई.पी.ए.), सेक्टर 26, चंडीगढ़ में शुरू हुआ। यह कार्यक्रम चंडीगढ़ डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (सी.डी.एम.ए.), चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एम.जी.एस.आई.पी.ए., पंजाब सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
श्री निशांत कुमार यादव, आई.ए.एस., उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डी.डी.एम.ए.), यू.टी. चंडीगढ़, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने आपदाओं से निपटने की तैयारी, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सामुदायिक स्तर पर समन्वित प्रतिक्रिया के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाकर अपने ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे आपातकालीन स्थितियों में समुदाय की प्रभावी ढंग से सहायता कर सकें।
उद्घाटन सत्र में सुश्री खुशप्रीत कौर, डैनिक्स, एस.डी.एम. (मध्य), चंडीगढ़; श्री राजीव तिवारी, निदेशक जनसंपर्क, चंडीगढ़ प्रशासन; श्री संजीव कोहली; डॉ. बालकृष्ण; तथा कर्नल अतुल पांडे, प्रमुख, आपदा प्रबंधन केंद्र, एम.जी.एस.आई.पी.ए., मौजूद थे।
इंजीनियर नितिका सिंगला, फैकल्टी सदस्य, एम.जी.एस.आई.पी.ए. ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी। कर्नल अतुल पांडे ने मुख्य भाषण दिया। इस अवसर पर पिछले बैचों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 419 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की प्रशिक्षण यात्रा को दर्शाती एक वीडियो भी दिखाई गई।
5 से 9 अक्तूबर 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को सिविल डिफेंस, खोज एवं बचाव, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु (सी.बी.आर.एन.) आपात स्थिति, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), बेसिक लाइफ सपोर्ट (बी.एल.एस.), कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सी.पी.आर.), घायलों की स्थिति के आधार पर उपचार की प्राथमिकता तय करने (ट्रायेज), भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया और आपातकालीन समन्वय की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में मैदानी प्रशिक्षण और आपातकालीन स्थितियों पर आधारित अभ्यास भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित सहायता कर्मियों के रूप में कार्य कर सकें और समुदायों को अधिक सुरक्षित, बेहतर तैयार तथा आपदाओं से उबरने में सक्षम बनाने में योगदान दे सकें।
