पंजाब बंद किरतियों और व्यापारियों ने मारा बंदी सिंहों के हक में हां का नारा

बठिंडा, 21 अगस्त 2026:- कौमी इंसाफ मोर्चे के आह्वान पर बंदी सिंहों की रिहाई के लिए दिए गए पंजाब बंद को बठिंडा जिले में भरवां समर्थन मिला। मोर्चे की मुख्य मांग उन बंदी सिंहों की रिहाई है जिन्होंने अपनी सजाएं पूरी कर ली हैं पर अभी भी जेल में हैं। इसके साथ ही जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल और बेअदबी व पुलिस गोलीकांड के मामलों में इंसाफ की मांग की जा रही है। कौमी इंसाफ मोर्चे के नेताओं के मुताबिक इस बंद के दौरान कारोबार, ट्रांसपोर्ट, सड़क और रेल सेवाएं सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रखी गईं और केवल जरूरी सेवाओं को ही चलने की इजाजत दी गई थी। बंद के दौरान पूरा दिन अमन शांति बनी रही और एहतियात के तौर पर पुलिस ने भी मुस्तैदी रखी।
बठिंडा के अलावा रामपुरा फूल, मौड़, भगता भाई और जींदा समेत पांच जगहों पर धरने दिए गए। सुबह से ही व्यापारियों ने दुकानों के शटर बंद रखे और इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर बाकी व्यापारिक संस्थान बंद रहे, जिसके कारण शहर में सन्नाटा रहा। हालांकि 12 बजे के बाद बठिंडा के बड़े बाजारों में दुकानें खुलनी शुरू हो गई थीं पर बस अड्डे के नजदीक पड़ते महीना चौक और कचहरी रोड पर ज्यादातर दुकानें दो बजे के बाद ही खोली गईं। सिख जत्थेबंदियों ने बस अड्डा चौक में सड़क पर जाम लगाया और धरना दिया। अलग-अलग जगहों पर लगाए धरनों के दौरान सुरजीत सिंह फूल, परमिंदर सिंह बालियांवाली, सुखजीत सिंह, भोला सिंह गिलपत्ती, चमकौर सिंह, बाबा हरदीप सिंह मेहराज समेत कई नेताओं ने शिरकत की।
नेताओं ने कहा कि बंदी सिंह तीस-तीस साल सजाएं भुगत चुके हैं पर सरकारें उन्हें रिहा करना तो दूर बल्कि पैरोल देने को भी तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जगतार सिंह हवारा की माता बीमार है पर केंद्र सरकार पैरोल के नाम पर मजाक कर रही है। नेताओं ने कहा कि व्यापारियों द्वारा सिख जत्थेबंदियों को पूर्ण सहयोग दिया गया है और अपनी दुकानें और कारोबार बंद रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि बंदी सिखों की रिहाई की मांग समूचे पंजाब वासियों द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि सिखों के लिए कानून और हैं जबकि बाकियों के लिए अलग हैं। सिख जत्थेबंदियों के इन नेताओं ने समस्त व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और लोगों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
उधर बस सेवा ठप होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रोजी-रोटी के लिए गांवों से आने वाले मजदूर और मुलाजिम साइकिलों, मोटरसाइकिलों या निजी वाहनों के जरिए शहर पहुंचे। अनाज मंडियों में भी बंद का पूरा असर देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि कौमी इंसाफ मोर्चा ने पुलिस कार्रवाई, अपने सदस्यों के विरुद्ध दर्ज एफ आई आर और बंदी सिंहों की लगातार नजरबंदी के विरोध में आज को 'पंजाब बंद' का आह्वान दिया था। दरअसल 15 अगस्त को चंडीगढ़ पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछारों और बैरिकेडों से कौमी इंसाफ मोर्चे का पंजाब राज भवन की ओर मार्च रोक दिया था और पुलिस द्वारा नेताओं और समर्थकों के विरुद्ध कई एफ आई आर दर्ज की गई थीं।