हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाकर मजबूत पंजाब के निर्माण की दिशा में कर रही है काम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

धूरी, 19 अगस्त 2026:- धूरी में आयोजित ‘तीयां दा मेला’ के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब की बेटियां अब ‘बेचारियां’ नहीं, बल्कि ‘शेरनियां’ हैं, जो हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं और राज्य की प्रगति के पीछे मजबूत शक्ति बनकर उभर रही हैं। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ‘मावां-धीआं सत्कार योजना’ के तहत 75 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹1,000-₹1,500 की सहायता दी जा रही है, जबकि 29,000 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 लाख महिलाओं को ₹631 करोड़ के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों के साथ-साथ ‘तीयां दा मेला’ जैसे आयोजन, जो पंजाब की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं, एक मजबूत और ‘रंगला पंजाब’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस शुभ अवसर की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “आज तीयां के त्योहार के अवसर पर धूरी में माताओं और बहनों के साथ खुशी के पल साझा किए। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि 75.24 लाख माताओं और बहनों को सम्मान राशि मिल चुकी है और बाकी बहनों को भी जल्द ही रक्षाबंधन के अवसर पर यह उपहार मिल जाएगा। आज हमारी बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और ‘बेचारियां’ नहीं बल्कि ‘शेरनियां’ बनकर उभर रही हैं। हमारी सरकार महिलाओं के सम्मान और गरिमा को सुनिश्चित करने तथा हर परिवार की जिम्मेदारियों को आसान बनाने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।”
सैफरन पाम्स, धूरी में आयोजित ‘तीयां दा मेला’ के दौरान अपनी पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान के साथ पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “महिलाओं की शासन, अर्थव्यवस्था और राजनीति में पूर्ण भागीदारी के बिना पंजाब देश में अग्रणी राज्य नहीं बन सकता। समय की मांग है कि लड़कियां अधिक प्रगतिशील पंजाब के निर्माण के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।” उन्होंने कहा कि यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘तीयां दा मेला’ पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और लोक गीतों को समर्पित एक विशेष उत्सव है। उन्होंने कहा, “तीयां पंजाबी संस्कृति में खुशी, उत्साह, एकजुटता और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक है। यह त्योहार युवा पीढ़ी को पंजाब की पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि तीयां का त्योहार मुख्य रूप से पंजाब की बेटियों, बहनों और महिलाओं की खुशी और उत्सव से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि गिद्धा, बोलियां, लोक गीत, फुलकारी, पंजाबी परिधान और पारंपरिक लोक कलाएं पंजाब की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। ‘तीयां दा मेला’ इन लोक कलाओं को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज की तेज रफ्तार और तेजी से डिजिटल होती दुनिया में बच्चों और युवाओं को अपनी जड़ों तथा सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है। यदि हम अपनी भाषा, लोक गीत, लोक नृत्य, पारंपरिक पहनावे और रीति-रिवाज अगली पीढ़ी तक नहीं पहुंचाएंगे तो यह समृद्ध विरासत धीरे-धीरे हमारे जीवन से गायब हो सकती है।” उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पंजाब की महिलाएं शिक्षा, खेल, प्रशासन, व्यापार, कला और कृषि सहित हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और राज्य की प्रगति के पीछे मजबूत शक्ति बनकर उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजन महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और अपनी पहचान तथा आत्मविश्वास को और मजबूत करने के अवसर प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोक गीतों, बोलियों और लोक साहित्य ने पंजाबी भाषा तथा सांस्कृतिक परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ‘तीयां दा मेला’ पंजाब के लोगों को अपनी विरासत से दोबारा जोड़ने और सांस्कृतिक गतिविधियों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, “यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित की है और आज वे राज्य की प्रगति को आगे बढ़ाने वाली शक्तिशाली ताकत हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने ‘मावां-धीआं सत्कार योजना’ शुरू की है।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत अब तक 75 लाख से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है और 1 अगस्त 2026 तक पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹2,274.42 करोड़ की वित्तीय सहायता सीधे जमा की जा चुकी है। भगवंत सिंह मान ने बाकी सभी महिलाओं से भी योजना के तहत अपना पंजीकरण करवाकर इसका लाभ उठाने की अपील की।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य के 23 जिलों में से 9 जिलों में महिला उपायुक्त और 8 जिलों में महिला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हैं। उन्होंने कहा, “यह इस बात का प्रमाण है कि यदि लड़कियों को अवसर दिया जाए तो वे जीवन में कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकती हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई अन्य पहल भी की हैं। पिछले चार वर्षों में लगभग 29,000 स्वयं सहायता समूह (SHGs) बनाए गए हैं, जिनसे करीब 3 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। पिछले चार वर्षों के दौरान स्वयं सहायता समूहों को ₹631 करोड़ के ब्याज मुक्त ऋण भी दिए गए हैं तथा पंजाब सरकार की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जा रही है।”
पंजाब की बेटियों की खुशियों, पंजाबी संस्कृति की खुशबू और राज्य की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने के लिए लोगों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आइए हम मिलकर ऐसा ‘रंगला पंजाब’ बनाएं, जो विकास में अग्रणी होने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के लिए दुनिया के सामने एक मिसाल बने।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पंजाब में शांति, साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महान गुरु साहिबानों, संतों, ऋषियों और पैगंबरों द्वारा दिखाए गए सदाचार के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान पंजाब के युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और कौशल प्रदान कर सशक्त बनाने पर है, ताकि वे अपना उज्ज्वल भविष्य बना सकें।
विभाजनकारी ताकतों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य की उपजाऊ धरती पर कुछ भी उग सकता है, लेकिन नफरत के बीज इस पवित्र भूमि पर कभी नहीं पनप सकते। महान गुरु साहिबानों ने हमें साम्प्रदायिक सद्भाव, शांति और भाईचारे का पाठ पढ़ाया है। पंजाबी अपने सभी त्योहार मिल-जुलकर मनाते हैं।”
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान शासकों की उदासीनता के कारण ऐसे कार्यक्रम बंद हो गए थे। उन्होंने कहा कि राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद माहौल बदला है और लोग ऐसे आयोजनों का आनंद ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत प्रत्येक परिवार को ₹10 लाख तक का कैशलेस उपचार मिल रहा है और अब तक 3 लाख से अधिक मरीजों ने ₹1,100 करोड़ का कैशलेस उपचार प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में 1,090 आम आदमी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन करीब 92,000 लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन क्लीनिकों में लोगों को मुफ्त उपचार प्रदान किया जा रहा है और अब तक इनकी ओपीडी में करीब 6 करोड़ मरीज पहुंच चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार 1,587 गांवों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है, जहां पहले कभी नहरी पानी नहीं पहुंचा था। किसानों को कृषि क्षेत्रों के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। यह गर्व की बात है कि राज्य सरकार ने हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए ₹7,200 करोड़ खर्च किए हैं।”
उन्होंने कहा कि उनके पदभार संभालने के बाद नहरी सिंचाई का क्षेत्र 26 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में केवल 20 लाख 89 हजार एकड़ क्षेत्र को नहरी पानी मिलता था, जबकि आज नहरी सिंचाई 60 लाख 30 हजार एकड़ क्षेत्र तक पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के लोगों की सुविधा के लिए 45,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2022 से करीब 90 प्रतिशत परिवारों को मुफ्त बिजली मिल रही है और उनके बिजली बिल शून्य आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि युवाओं को अब तक 69,000 से अधिक नौकरियां पूरी तरह योग्यता के आधार पर प्रदान की जा चुकी हैं।”
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर, डॉ. गुरप्रीत कौर मान सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।