“नेकी, सत्य, सहनशीलता और अहिंसा: आदर्श जीवन का आधार।”

आज 2 अक्टूबर का दिन बहुत ही शुभ अवसर है। पहला कारण यह है कि यह हमारे भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक, पवित्र दशहरा उत्सव, और दूसरा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 156वीं जयंती है। दोनों अवसर हमारे महान संस्कृति और इतिहास का सम्मान करते हैं। दशहरा या विजयदशमी (विजय का दिन) हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार नवरात्रि की नौ रातों के बाद अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी ने लंकापति रावण का वध किया था। यह दिन मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, यही कारण है कि इसे विजयदशमी कहा जाता है।

आज 2 अक्टूबर का दिन बहुत ही शुभ अवसर है। पहला कारण यह है कि यह हमारे भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक, पवित्र दशहरा उत्सव, और दूसरा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 156वीं जयंती है। दोनों अवसर हमारे महान संस्कृति और इतिहास का सम्मान करते हैं। दशहरा या विजयदशमी (विजय का दिन) हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार नवरात्रि की नौ रातों के बाद अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी ने लंकापति रावण का वध किया था। यह दिन मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, यही कारण है कि इसे विजयदशमी कहा जाता है।
 अश्विन का पूरा महीना त्योहारों और उत्सवों से भरा होता है। मौसम सुहावना हो जाता है, गर्मी कम हो जाती है और बारिश समाप्त हो जाती है। इस दिन लोग शस्त्रों और औजारों की पूजा करते हैं और नए व्यवसाय भी शुरू किए जाते हैं। गांव-गांव, शहर-शहर में रामलीला का आयोजन किया जाता है। दशहरे के अवसर पर जगह-जगह मेले लगते हैं और शाम को कुशल कारीगरों द्वारा बनाए गए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाता है।
भारत मुख्य रूप से मेलों और त्योहारों का देश है। हमारे देश का हर मौसम किसी न किसी त्योहार से जुड़ा हुआ है। दशहरा मौसम में परिवर्तन से भी जुड़ा है। हालांकि “ग्लोबल वॉर्मिंग” ने हमारे मौसमों को काफी हद तक बदल दिया है, लेकिन यदि हम पचास साल पहले की बात करें तो यह त्योहार सर्दी के मौसम की शुरुआत का प्रतीक माना जाता था। दशहरा शब्द का अर्थ है “दस सिरों को हरने वाला त्योहार,” क्योंकि हमारे महान प्राचीन ग्रंथ रामायण के अनुसार, लंका नरेश रावण के दस सिर थे। हालांकि रावण एक विद्वान और वीर योद्धा था, लेकिन वह घमंडी और छल-कपटी भी था। 
जब भगवान श्री रामचंद्र जी, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास काट रहे थे, तब रावण ने छल से सीता जी का अपहरण कर लिया। इसके परिणामस्वरूप श्री रामचंद्र जी की वानर सेना और रावण की राक्षस सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ। रावण मारा गया, और इसलिए हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में यह त्योहार बड़े जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हमारे देश के सभी त्योहार पवित्रता, सत्य और सदाचार का संदेश लाते हैं। दशहरा झूठ पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रेरणादायक पर्व है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी शक्ति, सदाचार, सत्य और एक आज्ञाकारी पुत्र की आदर्श मिसाल हैं।
इस पवित्र दिन पर, पूरा देश सत्य और अहिंसा के उपासक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को उनकी 156वीं जयंती पर श्रद्धांजलि और पुष्प अर्पित कर रहा है।

"दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।"

उस समय के प्रसिद्ध कवि प्रदीप का यह गीत महात्मा गांधी जी के विचारों, संघर्ष और कार्यशैली का सही प्रतिबिंब है। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। 2 अक्टूबर 1869 को गांधी जी का जन्म गुजरात (काठियावाड़) की पोरबंदर रियासत में हुआ था। विदेशों में रहकर उन्होंने वकालत की डिग्री प्राप्त की, लेकिन अपनी देश की सभ्यता और संस्कार हमेशा उनकी व्यक्तित्व की व्याख्या करते रहे। उनके विचार और शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। गांधी जी द्वारा प्रस्तावित शिक्षा प्रणाली को “मूल शिक्षा” कहा जाता है। 
उनका मानना था कि बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके उन्हें कुशल और स्वतंत्र बनाना चाहिए। गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने खादी के महत्व को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। वे पार्टी राजनीति के पक्षधर नहीं थे, बल्कि लोगों की राजनीति और उनके अधिकारों के समर्थक थे। लोकतंत्र गांधी जी का आदर्श था। जीवन भर उन्होंने अन्याय, शोषण और छुआछूत का विरोध किया। अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ गांधी जी का सबसे बड़ा हथियार सत्याग्रह था। सत्याग्रह में हड़ताल, भूख हड़ताल, असहयोग और सविनय अवज्ञा जैसे शांतिपूर्ण तरीके शामिल थे।
इसलिए, इस पवित्र दिन पर, जहां हमें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन और उच्च आचरण से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है, वहीं महात्मा गांधी जी की निस्वार्थ सोच, ईमानदारी और अन्य सद्गुणों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए।

-दविंदर कुमार

- देविंदर कुमार