चीमा ने मनप्रीत वाले चाले पकड़े कहीं कर्मचारी आप सरकार पर सियासी कीचड़ न फेंक दें
बठिंडा, 26 अगस्त 2026:- विधानसभा चुनावों से पहले 2021 में कांग्रेस के तत्कालीन वित्त मंत्री मनप्रीत बादल की तरह अब पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा भी सरकारी कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बने हुए हैं। 2017 में बठिंडा से करीब 20 हजार वोटों से जीते मनप्रीत बादल को 2022 में 63 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। उस समय कर्मचारियों के विरोध को भी अहम कारण माना गया था।
वित्त मंत्री होने के कारण सरकारी कर्मचारियों की मांगों और वित्तीय मुद्दों के साथ चीमा का सीधा संबंध बनता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने मुद्दों का जल्द समाधान नहीं किया तो इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। हालिया प्रदर्शनों में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों के बजाय चीमा के खिलाफ अधिक रोष देखने को मिल रहा है।
पिछले रविवार पुरानी पेंशन योजना सहित अन्य मांगों के लिए हजारों सरकारी कर्मचारी संगरूर जिले के गांव तोलावाल में इकट्ठे हुए और मुख्यमंत्री भगवंत मान के गांव सतौज की ओर रोष मार्च किया। इस दौरान भी वित्त मंत्री के खिलाफ रोष प्रमुख रहा। इससे पहले 22 अगस्त को ईटीटी अध्यापक यूनियन के नेतृत्व में करीब 180 अध्यापकों ने पंजाब के वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर चंडीगढ़ स्थित वित्त मंत्री के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन किया था।
अध्यापक संगठन का आरोप है कि चीमा ने विपक्ष के नेता होते हुए दिसंबर 2021 में मुद्दा सरकार बनने पर प्राथमिकता के आधार पर हल करने का भरोसा दिया था, पर मुद्दा अभी भी लटका हुआ है। सांझा मुलाजिम मंच द्वारा भी बकाया डीए के लिए 7 अगस्त को प्रदर्शन किया गया था।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार 27 अगस्त को लाखों सरकारी कर्मचारी सामूहिक छुट्टी लेकर रोष प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा सफाई सेवकों, पावरकॉम, मनरेगा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य विभागों के कर्मचारी भी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इनमें नियमितीकरण, पुरानी पेंशन और पंजाब के वेतनमानों की मांगें शामिल हैं।
**ऐसी कोई बात नहीं : पन्नू**
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है और हरपाल सिंह चीमा एक सफल वित्त मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार कर्मचारियों के साथ लगातार बैठकें कर रही है और जल्द ही मुद्दे हल कर लिए जाएंगे। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को किसी राजनीतिक नुकसान की संभावना से भी इनकार किया।
