वैंकूवर, कनाडा:- अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं ने सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों पर बड़ा अंकुश लगा दिया है। मतदाताओं के इस जनादेश ने राजनीतिक गलियारों में स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता द्वारा दी गई सत्ता मनमानी करने के लिए नहीं, बल्कि जनहितों की रक्षा करने के लिए होती है।

इन चुनावों के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने जोरदार वापसी करते हुए 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) और 100 सदस्यीय सीनेट, दोनों में ही पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही 30 राज्यों में अपने गवर्नर बनाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया है।

हालांकि डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के शेष दो वर्ष पूरे करेंगे, लेकिन अब उनके पास पहले की तरह मनमाने फैसले लेने की शक्तियां नहीं रह गई हैं। उनके लिए कोई भी विधायी फैसला लेना अब विपक्षी पार्टी की इच्छा पर निर्भर हो गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में ऐसी जबरदस्त लहर चली कि 8–10 राज्यों में 1932 से रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े लोग भी अपना रुख बदलकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में जाने को मजबूर हो गए।

मतदाताओं ने कई नामी कंपनियों के सर्वेक्षणों को भी गलत साबित कर दिया। मध्यावधि चुनावों की खास बात यह रही कि दोनों सदनों में दशकों से दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच सत्तारूढ़ दल को मामूली बहुमत मिलने के रुझान के बजाय इस बार जीत का अंतर काफी बड़ा रहा।

खबर लिखे जाने तक प्रतिनिधि सभा, जिसे आमतौर पर हाउस ऑफ कॉमन्स कहा जाता है, की 435 सीटों में से डेमोक्रेटिक पार्टी 228 सीटें जीत चुकी थी, जबकि 68 सीटों के नतीजे आने बाकी थे। सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी को केवल 139 सीटों पर जीत मिली थी।

100 सीटों वाली सीनेट के लिए हर दो साल बाद एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होते हैं। इसी व्यवस्था के तहत इस बार 35 सीटों पर मतदान हुआ। उपलब्ध कुल आंकड़ों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी ने 54 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि दो सीटों के नतीजे अभी आने बाकी हैं।

दूसरी ओर, देश के 50 राज्यों के गवर्नरों के नतीजों पर नजर डालें तो 28 राज्यों में डेमोक्रेटिक समर्थकों और 20 राज्यों में रिपब्लिकन समर्थकों के हाथों में सत्ता की बागडोर आई है। शेष दो राज्यों में अभी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। डेमोक्रेटिक पार्टी को बधाई देते हुए ट्रंप ने कहा कि भले ही उनकी पार्टी को विधायिका में बहुमत नहीं मिला है, लेकिन वह अमेरिका को मजबूत बनाने के लिए अपनी पसंद के फैसले लेते रहेंगे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि इस चुनाव में अमेरिकी मतदाताओं का संदेश स्पष्ट है कि उन्होंने विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुटता के पक्ष में मतदान किया है और उन्हें एकजुटता में अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद दिखाई दी है।