लुधियाना, 4 नवंबर 2026:- गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना में ‘खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए जीनोम एडिटिंग (संशोधन)’ विषय पर चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। इसमें भारत, कनाडा और जर्मनी के वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, कुलपति ने विश्वविद्यालय के सहयोगात्मक कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम कनाडा की एक शोध पहल के सहयोग और समर्थन से संचालित किया जा रहा है, जिसमें मैकगिल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय भी भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों के दौरान इस कार्यक्रम ने स्नातक पाठ्यक्रमों, संगोष्ठियों और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न तकनीकों में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया है। इसके साथ ही, इसने युवा शोधकर्ताओं में आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान की क्षमता, टीम भावना और नेतृत्व के गुणों को भी प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कृषि, पशु विज्ञान, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-विषयक शोध के महत्व पर जोर दिया।

कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी के डीन एवं आयोजन सचिव डॉ. राम सरन सेठी ने बताया कि संगोष्ठी में विशेषज्ञों द्वारा जीनोम एडिटिंग, जीनोमिक्स और पशु जैव प्रौद्योगिकी तथा कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में इनके उपयोग पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी युवा शोधार्थियों को प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के साथ संवाद करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के व्यावहारिक एवं व्यावसायिक उपयोगों को समझने का अवसर प्रदान करती है।

कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने इस पहल के विकास का उल्लेख किया और भागीदार संस्थानों के योगदान की सराहना की। ऑनलाइन शामिल हुए यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के उपाध्यक्ष (अनुसंधान) डॉ. बलजीत सिंह ने अंतर-विषयक शोध तथा प्रयोगशाला में प्राप्त निष्कर्षों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर जोर दिया। पीएयू के निदेशक अनुसंधान डॉ. अजमेर सिंह धट्ट ने क्षेत्रीय स्तर की चुनौतियों का समाधान करने और किसान समुदाय को लाभ पहुंचाने पर केंद्रित समाधान-उन्मुख शोध के महत्व पर बल दिया।

विभिन्न सत्रों में इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज, भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. देबाशीष दाश शामिल हुए, जिन्होंने समुद्री जैव प्रौद्योगिकी पर चर्चा की। मोहाली के डॉ. अश्वनी पारीक ने कृषि में जीनोम एडिटिंग पर प्रकाश डाला। नई दिल्ली के डॉ. मनोज प्रसाद ने पादप जीनोमिक्स, वैज्ञानिक अनुसंधान के व्यावहारिक रूपांतरण और परामर्श पर विचार रखे। हैदराबाद के डॉ. रवि कुमार गंधम ने ज़ेबू नस्ल की गायों के सुधार और टिकाऊ पशुधन उत्पादन में जीनोमिक्स की भूमिका को रेखांकित किया।

पीएयू के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. योगेश विकास ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।