चंडीगढ़, 4 नवंबर:- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के आसपास फैलने वाली दुर्गंध से अब लोगों और किसानों को राहत दिलाने की तैयारी है। हरियाणा में शोधित अपशिष्ट जल की दुर्गंध कम करने के लिए 24 एसटीपी पर एक्टिवेटेड कार्बन आधारित सिस्टम लगाए जाएंगे। इस पर लगभग 3,865.806 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एसटीपी के आसपास दुर्गंध की समस्या को गंभीरता से लेते हुए शोधित पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और किसानों की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
मंत्री रणबीर गंगवा हरियाणा सिविल सचिवालय में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में 25 करोड़ रुपये और इससे अधिक लागत वाली प्रमुख योजनाओं की सर्कलवार समीक्षा की गई। विभाग की अतिरिक्त सचिव श्रीमती रेणु सोगन, इंजीनियर-इन-चीफ श्री देवेंद्र दहिया सहित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे, जबकि प्रदेशभर के अधीक्षण अभियंता (एसई), कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) और उपमंडल अभियंता (एसडीओ) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
मंत्री गंगवा ने कहा कि एसटीपी के आसपास दुर्गंध फैलने और शोधित अपशिष्ट जल की गुणवत्ता को लेकर किसानों तथा स्थानीय लोगों की शिकायतें सामने आती रहती हैं। विभाग यह सुनिश्चित करे कि ट्रीटमेंट के बाद पानी की गुणवत्ता बेहतर हो और इसके उपयोग से आसपास के लोगों को कोई परेशानी न हो। उन्होंने अधिकारियों को एक्टिवेटेड कार्बन आधारित प्रणाली से जुड़े कार्यों को गंभीरता से आगे बढ़ाने और किसानों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस कार्य के लिए प्रदेश में 25 एसटीपी चिह्नित किए गए हैं। इनकी कुल ट्रीटमेंट क्षमता 230.5 एमएलडी है। इन एसटीपी में प्रतिदिन लगभग 171.13 एमएलडी सीवेज पहुंचता है। इनमें से 24 एसटीपी में एक्टिवेटेड कार्बन की व्यवस्था प्रस्तावित है। इस पर लगभग 3,865.806 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है।
इन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम
विभाग की योजना के तहत अंबाला सर्कल के छछरौली, पिंजौर के माणकपुर और बराड़ा के मौजगढ़ रोड स्थित एसटीपी में एक्टिवेटेड कार्बन सिस्टम लगाने की तैयारी है। हिसार सर्कल में हिसार के ऋषि नगर, राजगढ़ रोड, कैमरी रोड और सातरोड़; हांसी में लालपुरा रोड और भिवानी रोड; तथा नारनौंद में हांसी-जिंद रोड स्थित एसटीपी शामिल हैं। जींद सर्कल में हांसी रोड, पुराना हांसी रोड और नरवाना रोड, जुलाना में सीएचसी के नजदीक तथा सफीदों के गांव रामपुरा स्थित एसटीपी भी इस योजना में शामिल हैं।
इसी प्रकार सिरसा सर्कल में फतेहाबाद के खाराती खेड़ा रोड, फतेहाबाद में भट्टू रोड और भूना में कुलां रोड स्थित एसटीपी शामिल हैं। भिवानी सर्कल में भिवानी के दादरी रोड और धाणा रोड, सिवानी में तोशाम रोड तथा लोहारू में श्मशान घाट के नजदीक स्थित एसटीपी पर भी यह प्रणाली स्थापित करने की तैयारी है। इन स्थानों पर एक्टिवेटेड कार्बन आधारित सिस्टम के माध्यम से शोधित अपशिष्ट जल की दुर्गंध कम करने और इसके पुनः उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
स्वच्छ पेयजल के लिए अधिकारी फील्ड में बढ़ाएं निगरानी
बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रमुख योजनाओं की सर्कलवार समीक्षा की गई। इस दौरान योजनाओं की प्रगति, बजट के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का जायजा लिया गया। मंत्री रणबीर गंगवा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में तेजी लाने के साथ-साथ गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाना विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पानी जीवन का आधार है और भारतीय परंपरा में भी इसे विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए विभाग के उच्च अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से फील्ड में जाकर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता और चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करें। जहां भी कोई कमी या शिकायत सामने आए, उसका तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाए।
मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा: किसानों को न हो कोई परेशानी, पानी की गुणवत्ता पर रखी जाए विशेष नजर
मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि सिंचाई सहित अन्य कार्यों में शोधित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग बढ़ाने के लिए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है। किसानों को इस पानी का उपयोग करने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। एसटीपी के आसपास दुर्गंध की समस्या हो या शोधित पानी की गुणवत्ता से संबंधित शिकायत, अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लें और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। सरकार का प्रयास है कि सीवेज के पानी का बेहतर ट्रीटमेंट हो और इसका सुरक्षित एवं लाभकारी पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
