चंडीगढ़ (बलविंदर सिंह):- कनाडा के एडमंटन शहर की खूबसूरत एडमंटन पब्लिक लाइब्रेरी की मीडोज शाखा, 17 स्ट्रीट में प्रसिद्ध गजलकार कुलविंदर फुल की पुस्तक ‘तेरे बिना’ का दृश्य प्रदर्शन, सम्मान समारोह और कवि दरबार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलविंदर फुल, दलवीर सिंह रियाड़ और सुरजीत कौर धालीवाल ने की। मुख्य अतिथियों के रूप में जसबीर दियोल विधायक, कैनेडियन यूनियन ऑफ पब्लिक एम्प्लॉइज अल्बर्टा की अध्यक्ष मैडम राज उप्पल तथा उभरते गीतकार और स्तंभकार दीपा बंडाला ने शिरकत की।

बलविंदर बालम, दलवीर सिंह रियाड़ और अमृतपाल सिंह ने सभा की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए सभी का स्वागत किया और आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जसबीर दियोल और मैडम राज उप्पल ने अपने निजी विचारों के साथ-साथ कनाडा के मौजूदा हालात पर भी विचार रखे। गजलकार कुलविंदर फुल ने अपनी जीवनशैली और पुस्तक की रचनात्मकता पर प्रकाश डाला।

बलविंदर बालम ने कुलविंदर फुल की पुस्तक ‘तेरे बिना’ पर विचार रखते हुए कहा कि कुलविंदर फुल एक परिपक्व गजलकार हैं और दिवंगत जनाब दीपक जैतोई साहिब के शिष्य हैं। उनकी गजलों में रुक्न, अरकान, अवुरध, अवरधक, साकन, मुतहर्रिक तथा बहर, वजन और भाषा का पूरा ध्यान रखा गया है। हालांकि छोटी बहरों का प्रयोग किया गया है, लेकिन शेरों में ताजगी और झरने के प्रवाह जैसी रवानी तथा रस पैदा होता है। पुस्तक में कुल 112 गजलें हैं।

उनकी गजलें पढ़ते हुए कुछ शेर मन में पूरी तरह बस जाते हैं। आइए, उन शेरों के साथ हम भी अपनी सांझ साझा करें। उदाहरण के लिए:

बदल किरपा कर जाएगा हौली हौली

सड़कां सागर भर जाएगा हौली हौली

और

ताजा हवा हमेशा आएगी यारो

जेहन दे विच जे आपां बारी लाइए

और

रोज एस दी पूजा करनी पैंदी है

हथीं मिट्टी गोह के बुत बनाया है

और

माड़े लफ्ज जो गीतां दे

इह पुड़ियां ने जहर दियां

और

औरतां जे पाऊं जेवर वांगरा

इक नवीं सूक्ष्म हया है जिंदगी

कुलविंदर फुल ने भौतिक संदर्भों, रोमांटिकता और जीवन के हर पहलू पर शेर कहे हैं।

इस अवसर पर कुलविंदर फुल, जसबीर दियोल विधायक और राज उप्पल को गुरमुखी अंकित शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शामिल कवियों और साहित्य प्रेमियों में दलवीर सिंह रियाड़, बलविंदर बालम, दीपा बंडाला, दर्शन अंजान, सुरजीत कौर धालीवाल, अमृतपाल अमृत, अजीत सिंह खंगूरा, करज सिंह औलख, नरिंदर सिंह लुबाना, कुलविंदर फुल, तेजिंदरपाल सिंह रियाड़, करनैल सिंह परमार, सुखदेव सिंह, सतनाम सिंह गाहले, पारस महीनियां, गुरनाम सिंह अटवाल, मलकीत सिंह, महिंदर सिंह औलख, मनजीत सिंह बल्ल, देविंदर सिंह बैंस, नरिंदर सिंह अटवाल, किरपाल सिंह धूरी, नसीर महमूद और केवल सिंह बल शामिल रहे। कवियों ने अपनी कविताएं सुनाकर समां बांध दिया। यह आयोजन सभी के लिए यादगार बन गया।