पेरिटोनियल डायलिसिस में नैदानिक विशेषज्ञता पर वर्कशॉप आयोजित
अंबाला, 21 जुलाई:- पार्क हीलिंग टच हॉस्पिटल, अंबाला ने पेरिटोनियल डायलिसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से 'पीडी एक्सेस मास्टर क्लास 2026' वर्कशॉप का सफलतापूर्वक आयोजन किया। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य पेरिटोनियल डायलिसिस एक्सेस में क्लिनिकल विशेषज्ञता और मरीजों के अनुकूल नए नवाचारों को बढ़ावा देना था।
इस कार्यशाला के दौरान कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट फिजिशियन, डॉ. ज्योति अग्रवाल ने लोकल एनेस्थीसिया के तहत परक्यूटीनियस पीडी कैथेटर इंसर्शन के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसे प्रशिक्षित नेफ्रोलॉजिस्ट स्वयं कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "डायलिसिस के मरीजों को अक्सर कई अन्य बीमारियां भी होती हैं, जिससे जनरल एनेस्थीसिया की आवश्यकता वाली प्रक्रियाओं के दौरान जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे अधिकांश मरीजों में, परक्यूटीनियस तरीका एक कम इनवेसिव विकल्प प्रदान कर सकता है, जो संभावित रूप से मरीज के आराम में सुधार करता है और समय पर पेरिटोनियल डायलिसिस शुरू करने में मदद करता है।"
वर्कशॉप में, परक्यूटीनियस पद्धति का उपयोग करके दो मरीजों के सफलतापूर्वक पीडी कैथेटर डाले गए, जो पेरिटोनियल डायलिसिस एक्सेस में प्रक्रियात्मक प्रशिक्षण और नैदानिक अभ्यास को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वर्कशॉप में चिकित्सा पेशेवरों और विशेषज्ञों को पीडी कैथेटर लगाने की उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने और कौशल को मजबूत करने के साझा उद्देश्य के साथ एक मंच पर लाया गया। इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को बहुमूल्य व्यावहारिक अनुभव और परक्यूटीनियस पीडी एक्सेस तकनीकों के नैदानिक अनुप्रयोग की गहरी समझ प्रदान की।
एम्स, बठिंडा के नेफ्रोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ नायक ने भी इस वर्कशॉप में भाग लिया।
