महिला सरपंच बने बदलाव की सूत्रधार डॉ चौहान

नीलोखेड़ी/ करनाल, 16 जनवरी:- वैदिक काल में भारतीय महिलाएं मंत्रदृष्टा ऋषिकाएँ भी थी और आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं की युद्ध में भागीदारी का भी उल्लेख मिलता है। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे संस्थान में  “आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत” विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम राज्य पंचायत संसाधन केंद्र, नीलोखेड़ी के सहयोग से आयोजित किया गया।
अपने उद्घाटन सत्र में निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने अपने संबोधन में बताया कि राज्य की 23 ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार की योजना के अनुरूप आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत के रूप में विकसित किया जाना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से बीते लगभग एक वर्ष से निरंतर संचालित किया जा रहा है, ताकि ग्राम स्तर पर समावेशी, समानता आधारित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके।
डॉ चौहान ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई एवं रानी दुर्गावती के साहस और शौर्य का उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय इतिहास में महिलाओं ने विद्वता, नेतृत्व और वीरता की अद्वितीय मिसालें प्रस्तुत की हैं।
उन्होंने ने वैदिक काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय न केवल पुरुष, बल्कि महिलाएं भी समाज में समान रूप से सहभागी थीं। उन्होंने लोपामुद्रा, मैत्रेयी, घोषा, अपाला, सूर्य सावित्री, यमी एवं गार्गी जैसी विदुषी महिलाओं के उदाहरण देकर बताया कि ये मंत्रदृष्टा ऋषिकाएँ थी।
उन्होंने सामाजिक परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि गुलामी के दौर में बेटियों के बड़े होने पर अपहरण जैसी आशंकाओं के कारण उन्हें घर के भीतर सीमित रखने की मानसिकता रही, लेकिन समय के साथ यह सोच बदली है। भारत की मूल चेतना में महिला और पुरुष दोनों को समान सम्मान प्राप्त है—यही हमारी संस्कृति की पहचान है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने महिला सरपंचों को संकल्प दिलवाया कि वे अपने-अपने गांवों में अद्भुत एवं क्रांतिकारी कार्य करेंगी। उन्होंने ग्राम पंचायत विकास योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जनसहभागिता के साथ कार्य करने पर जोर दिया।
उन्होंने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में हिंदी भाषा के अधिकतम उपयोग का संकल्प भी दिलवाया। “मेरा गांव—मेरी पंचायत” का संदेश देते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के साथ कार्य करने से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. नीलम छिकारा ने मुख्य अतिथि डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान का स्वागत करते हुए आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत डैशबोर्ड के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह डैशबोर्ड ग्राम पंचायतों में महिलाओं की सहभागिता, योजनाओं के क्रियान्वयन तथा महिला हितैषी गतिविधियों की निगरानी के लिए एक प्रभावी माध्यम है, जिससे पंचायतों के कार्यों को पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा।
इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय  से राष्ट्रीय सलाहकार पीयाली रॉय चौधरी, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से सलाहकार गुरबिंदर सिंह, यमुनानगर से जिला परियोजना प्रबंधक तृप्ति, महेंद्रगढ़ से सरपंच सुमन देवी, पटौदी से सरपंच मंजू बाला, दयालपुर (थानेसर) से सरपंच सीमा सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।