आयरलैंड में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया संबोधन

लुधियाना, 23 जून 2026:- गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी ने एक बार फिर अपनी उपलब्धियों में नया अध्याय जोड़ा है। कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड साइंस टेक्नोलॉजी (सीडीएफएसटी) की डॉ. अंजू बूरा खटकर और डॉ. सुनील कुमार को आयरलैंड गणराज्य के डबलिन स्थित Teagasc Food Research Centre में आयोजित **इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन अल्ट्रासोनिक्स फूड एंड टेक्नोलॉजी 2026 (SonicsFoodTech 2026)** में मुख्य वक्ता (कीनोट स्पीकर) के रूप में आमंत्रित किया गया। यह भी गर्व का विषय है कि डॉ. खटकर ने यह सहभागिता भारत सरकार के **ANRF–इंटरनेशनल ट्रैवल सपोर्ट (ITS) अवार्ड** के प्राप्तकर्ता के रूप में निभाई।
डॉ. अंजू बूरा खटकर ने अपने कीनोट व्याख्यान **“Ultrasonication-Driven Modification of Food Proteins: Structural Insights and Functional Transformation from Lab to Field”** में खाद्य प्रोटीनों में अल्ट्रासोनिक तकनीक द्वारा किए जाने वाले परिवर्तनों तथा कार्यात्मक एवं क्लीन-लेबल खाद्य प्रणालियों के विकास में गैर-तापीय तकनीकों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
वहीं, डॉ. सुनील कुमार ने अपने कीनोट व्याख्यान **“Unravelling the Potential of Buffalo Milk Protein Concentrate Employing Ultrasonication: Functional and Structural Characterization”** के माध्यम से भैंस के दूध से प्राप्त प्रोटीन की उपयोगिता और उसके मूल्य संवर्धन को प्रस्तुत किया। उन्होंने पंजाब की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए इसे भविष्य में यूरोप के लिए “बफेलो मिल्क प्रोटीन बाउल” के रूप में विकसित किए जाने की अवधारणा रखी। उनके व्याख्यान ने भारत-यूरोप अनुसंधान सहयोग और तकनीक के व्यावसायीकरण को लेकर सार्थक चर्चाओं को भी बढ़ावा दिया।
सीडीएफएसटी के डीन डॉ. एस.पी.एस. घुमन ने कहा कि Teagasc में कॉलेज के दो शिक्षकों को कीनोट स्पीकर के रूप में आमंत्रित किया जाना तथा उनमें से एक को ANRF–ITS का समर्थन मिलना संस्थान में हो रहे शोध कार्यों की गुणवत्ता और प्रभाव को दर्शाता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जतिंदर पॉल सिंह गिल ने दोनों वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि आयरलैंड में Teagasc के मंच से दिए गए ये दोनों कीनोट व्याख्यान विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय सहभागिताएं वैश्विक शोध साझेदारियों को मजबूत करने के साथ-साथ पशुधन और डेयरी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देती हैं, जिसका सीधा लाभ किसानों और डेयरी उद्योग को मिलेगा।