वेटरनरी विश्वविद्यालय ने पशुपालकों की जरूरतों की पहचान के लिए किया कार्यशाला का आयोजन
लुधियाना 16 जून 2025- गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के सेंटर फॉर वन हेल्थ द्वारा राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शीर्षक मिलन-2025 था, जिसका विषय था 'पंजाब के पशुपालकों की जरूरतों की पहचान'।
बहु-हितधारक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वाइस चांसलर ने पशुपालकों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि हमें किसानों की जरूरतों को उनके नजरिए से पहचान कर वैज्ञानिक ज्ञान और व्यावहारिक समाधान प्रदान करने की जरूरत है।
सेंटर फॉर वन हेल्थ के निदेशक एवं कार्यशाला के प्रशासनिक सचिव डॉ. जसबीर सिंह बेदी ने इस केंद्र के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए पशु-मानव और पर्यावरण के अंतर्संबंधों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान न केवल पशु उत्पादन में योगदान दे रहा है, बल्कि वैज्ञानिक प्रगति में भी भागीदार बन रहा है। राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशक डॉ. तारू शर्मा ने इस बैठक के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पशुपालन की चुनौतियों के समाधान में संस्थाओं की साझेदारी काफी कारगर साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि हमारा संस्थान पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के सतत विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने वेटरनरी विश्वविद्यालय की भूमिका की भी सराहना की कि वह एकीकृत अनुसंधान, क्षेत्रीय स्तर की आवश्यकताओं एवं नियोजन के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
तकनीकी सत्रों में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने आधुनिक फार्म प्रबंधन तथा अतिरिक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. परमिंदर सिंह ने डेयरी पशुओं के समक्ष चुनौतियों पर चर्चा की। 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों, पशु चिकित्सा अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों एवं विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने जीवंत चर्चा में भाग लिया तथा वर्तमान आवश्यकताओं एवं समस्याओं पर चर्चा की।
कार्यशाला इस विश्वास के साथ संपन्न हुई कि किसानों के समक्ष आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए एक संरचित ढांचा विकसित किया जाना चाहिए जिसमें विज्ञान आधारित दृष्टिकोण अपनाए जाएं तथा किसानों का उत्थान हो।
