संवेदनाओं का दरिया है वेदना के स्वर डॉ ओमप्रकाश कादयान
फतेहाबाद, 16 सितंबर:- फतेहाबाद के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. सुदामा शास्त्री की नई प्रकाशित काव्य पुस्तक ‘वेदना के स्वर’ पर परिचर्चा को लेकर हिंदी पखवाड़े के अवसर पर पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया उपकेंद्र, फतेहाबाद में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनेक विद्वानों व साहित्यकारों ने इस पुस्तक को लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पावर ग्रिड के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक जितेंद्र कुमार ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात लेखिका व कवयित्री डॉ. सुमन कादयान तथा विशेष आमंत्रित अतिथि के तौर पर कवयित्री सुमन लता ‘सुमन’ ने शिरकत की। मंच संचालन पावर ग्रिड के अभियंता सुधाकर रावत ने किया।
पुस्तक परिचर्चा के दौरान डॉ. ओमप्रकाश कादयान ने कहा कि एक कवि का हृदय संवेदनाओं से परिपूर्ण होता है। सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों से अभिभूत होने पर स्वत: उसके हृदय से संवेदनाओं का स्वर प्रस्फुटित होने लगता है। उन्हीं स्वरों को कविता के रूप में कवि कागजों पर उल्लेखित कर देता है। कवि डॉ. सुदामा शास्त्री की नई प्रकाशित पुस्तक ‘वेदना के स्वर’ इन्हीं संवेदनाओं का दरिया है, जिसमें सामाजिक, धार्मिक, राष्ट्रीय और राजनीतिक विषयों पर कविताओं की अजस्र धारा प्रवाहित की गयी है। कवि ने मानव जीवन की उपमा रेल से की है। उन्होंने इस प्रकार अपनी रचना के माध्यम से मानवीय जीवन को रेखांकित किया है, ‘चली जा रही है जीवन की रेल, मुसाफिर समझकर पकड़ ले तू मेल। पता नहीं कब इंजन हो जाए फेल, प्रभु के हाथों में जीवन का खेल।’ इस रचना के माध्यम से कवि ने मानव जीवन का चरित्र चित्रण बखूबी चित्रित किया है। यह जीवन क्षणभंगुर है। पल-पल इसमें क्षीणता चली आ रही है। हम समझते हैं कि हमारी उम्र बढ़ रही है लेकिन वास्तव में घटती जा रही है। इसी बात को कवि ने दर्शाया है।
डॉ. कादयान ने कहा कि ‘वेदना के स्वर’ वर्तमान समाज का यथार्थ आईना है। पावर ग्रिड के उपमहाप्रबंधक जितेंद्र कुमार ने कहा कि कवि ने धार्मिक उन्माद पर अपनी रचना के माध्यम से धर्म के नाम पर धर्मांध लोगों को अवगत कराया है कि धर्म हमें लड़ना नहीं सिखाता है, बल्कि धर्म हमें जीवन का मार्ग सिखाता है। जीने की कला का नाम ही धर्म है। विज्ञान के शिखर पर बैठकर भी पशुता चढ़ जाती है। ज्ञान के दर्पण पर चढ़ी धूल सत्यता से भटकाती है। लोकाचार व्यवहार नहीं सिखा, डिग्रियां सिर्फ कागज की रह जाएगी। सेवा समर्पण त्याग न सीखा दौड़ती दौलत सिर्फ रह जाएगी।
कवयित्री डॉ. सुमन कादयान ने कहा कि कवि ने सरहद पर सीमाओं की रक्षा करने में प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के प्रति अपनी रचना के माध्यम से अपने भावों को कुछ इस प्रकार पिरोया है ‘मैं सरहद पर सर कटाने जाता हूं, भारत का भाल ऊंचा रहे, तभी तिरंगे में लिपट जाता हूं।’ कवि ने नारी की महानता को कुछ इस प्रकार अपनी रचना के माध्यम से व्यक्त किया ‘नारी तूने ही राम कृष्ण दयानंद पैदा किये।
ऋषि मुनि संत महात्मा जग को दिए। राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह जैसे शहीद दिए। लाजपत, सुभाष, आजाद जैसे महावीर पैदा किये।’ कवयित्री सुमन लता ने कहा कि डॉ. सुदामा शास्त्री की नई पुस्तक ‘वेदना के स्वर’ अवश्य ही पाठकों के हृदय को प्रभावित करके समाज में बेहतर बदलाव लाने में अपना सहयोग दे सकती है। अतिथियों ने डॉ. सुदामा शास्त्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
