वीसी ने फंडों की कमी का ठीकरा पंजाब सरकार पर फोड़ा
पटियाला:- पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने विश्वविद्यालय में फंडों की कमी के लिए पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराया है तथा अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) शिक्षकों को हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार यूजीसी वेतनमान देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, पंजाबी यूनिवर्सिटी कॉन्ट्रैक्ट टीचर एसोसिएशन (पुक्टा) ने सवाल उठाया है कि यदि विश्वविद्यालय के पास नई नियुक्तियों के लिए धन उपलब्ध है, तो अनुबंध शिक्षकों को उनका वैधानिक अधिकार देने के लिए धन क्यों नहीं है। यह बातें आज वाइस चांसलर के साथ हुई बैठक के बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने साझा कीं।
पुक्टा की अध्यक्ष डॉ. तरनजीत कौर ने बताया कि आज अनुबंध शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल वाइस चांसलर से मिला और हाई कोर्ट के आदेशों के अनुरूप अनुबंध शिक्षकों को यूजीसी नियमों के अनुसार वेतनमान देने की मांग की। हालांकि वाइस चांसलर ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार विश्वविद्यालय को पर्याप्त अनुदान नहीं दे रही है। सरकार से अतिरिक्त फंड न मिलने के कारण विश्वविद्यालय हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार वेतन बढ़ाने में असमर्थ है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय इस मामले में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करने पर विचार कर रहा है।
एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि जब पहले गेस्ट टीचरों के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला आया था, तब विश्वविद्यालय ने उसे लागू कर दिया था। फिर अनुबंध शिक्षकों के मामले में अलग रवैया और भेदभावपूर्ण नीति क्यों अपनाई जा रही है?
पुक्टा के महासचिव रमणप्रीत सिंह ने कहा कि एक ओर विश्वविद्यालय फंडों की कमी का हवाला दे रहा है, जबकि दूसरी ओर नई भर्तियों की प्रक्रिया जारी है। यदि विश्वविद्यालय के पास नई नियुक्तियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तो हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार अनुबंध शिक्षकों को उनका वैध अधिकार देने से इनकार क्यों किया जा रहा है? यह दोहरा मापदंड और भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शीघ्र ही हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो पुक्टा अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष तेज करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
पुक्टा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से अपील की है कि माननीय हाई कोर्ट द्वारा अनुबंध शिक्षकों के पक्ष में दिए गए फैसले को बिना किसी और देरी के पंजाबी यूनिवर्सिटी में लागू कराया जाए, ताकि अनुबंध शिक्षकों को उनका कानूनी और न्यायोचित अधिकार मिल सके। एसोसिएशन ने कहा कि यदि पंजाब सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और "शिक्षा क्रांति" के अपने दावों को वास्तविकता में बदलना चाहती है, तो पिछले 15–20 वर्षों से सेवा दे रहे अनुबंध शिक्षकों को न्याय दिलाना उसकी सबसे बड़ी कसौटी होगी।
