सरकारी स्कूल लेक्चररों की योग्यता पर उंगली उठाने वाले बाज आएं

गवर्नमेंट स्कूल लेक्चरार्स यूनियन पंजाब की बैठक प्रदेश अध्यक्ष श्री संजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में लेक्चररों से प्रिंसिपल पद पर केवल योग्यता के आधार पर तरक्की के मुद्दे पर विस्तार से विचार किया गया।
उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि विभाग ने इन तरक्कियों के लिए योग्यता एम.ए. + बी.एड. के साथ 5 साल का अनुभव निर्धारित किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिन लेक्चररों पर तरक्की के लिए विचार किया जा रहा है, उनका अनुभव 25 साल से अधिक का है और इनमें से 10% पीएच.डी, 20% एम.फिल/एम.एड/एलएलबी/मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन धारक हैं या अलग-अलग विषयों में दो-तीन एम.ए. किए हुए हैं। उन्होंने आगे बताया कि लगभग 25% स्कूल लेक्चरर कॉलेज या यूनिवर्सिटी स्तर की योग्यता रखते हैं। इसके साथ ही इन लेक्चररों का 15 से 20 साल का प्रशासनिक अनुभव (डीडीओ पावर सहित या इंचार्ज के रूप में) भी है।
संघ के मुख्य सलाहकार सुखदेव सिंह राणा ने बताया कि बहुत से लेक्चरर पंजाब सरकार से स्टेट अवार्ड तथा भारत सरकार से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर अपना कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। साथ ही बहुत से लेक्चरर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन द्वारा ली जाने वाली नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) भी क्लियर कर चुके हैं।
प्रदेश महासचिव सरदार बलराज सिंह बाजवा ने कहा कि जब पंजाब में लगभग 1100 सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रिंसिपल के पद खाली पड़े हैं, उस समय स्कूलों का प्रबंधन ये स्कूल लेक्चरर अपने विषय पढ़ाते हुए साथ-साथ कर रहे हैं।
प्रदेश महासचिव सरदार रविंदर पाल सिंह ने कहा कि उच्च योग्यता प्राप्त एवं लंबे अनुभव वाले लेक्चररों को प्रिंसिपल के रूप में सेवाएं देने की अनुमति देना सरकार का एक सराहनीय कदम है, जिसका संघ दिल से स्वागत करता है।
इस संबंध में प्रदेश प्रैस सचिव सरदार रणबीर सिंह सोहल ने कहा कि कुछ कैडर-दुश्मन तत्व लेक्चररों की योग्यता व अनुभव को कम आंकते हुए समाज में कैडर के चेहरे को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे तत्वों को चेतावनी देते हुए उन्होंने सलाह दी कि वे तुरंत लेक्चरर कैडर विरोधी गतिविधियों से बाज आएं, वरना संघ को कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई का रास्ता अपनाना पड़ेगा।