शिक्षित महिला समाज की सुत्रधार पूजा दलाल
हरियाणा/हिसार:- एक समय था जब महिलाओं की पढ़ाई की ओर कोई ध्यान ही नहीं देता था। वे केवल घर का चूल्हा चौका करने के लिए ही पैदा होती थीं। हर वक्त बस घर के कामकाज में लगी रहती थीं और शायद इसलिए उन्हें उसके दुष्परिणाम भी झेलने पड़ते थे। कोई भी पुरुष कहीं पर भी उनका अपमान कर देता था, फिर चाहे वह घर में हो या बाहर। महिलाएं पर्दे में रहा करती थीं।
उनकी सिर्फ यही पहचान थी कि वह घरेलू है, अनपढ़ है, बेअक्ल है, गंवार है। हर कोई यही कहता था कि “यह तो औरत है इसे क्या पता।” किसी भी मामले में औरतों की राय मानी नहीं रखती थी। स्त्रियों का घर से निकलना दूर था, वह सिर्फ जंगल से लकड़ी काटने, कुएं से पानी लाने आदि कामों में योगदान के योग्य समझी जाती थीं। कम उम्र में ही विवाह हो जाने के कारण, शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण बहुत सी दिक्कतों का सामना भी करती थीं। कई-कई बच्चे हो जाने से उनकी मृत्यु दर भी अधिक थी। बस वे बच्चों के पालन-पोषण में ही लगी रहती थीं।
मगर अब ऐसा नहीं है। अब हमारे देश में महिलाओं को शिक्षित करने पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जो कि बेहद उत्तम कार्य है। आज की महिला शिक्षित होने के कारण घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारी उठा रही है। वह हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर रही है। महिलाओं के शिक्षित होने से देश में आर्थिक, सामाजिक तरक्की भी हो रही है।
शिक्षित होने के कारण महिलाएं अपने हक के लिए भी लड़ पा रही हैं। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गई हैं। पुरुषों से कहीं ज्यादा हद तक वह किसी भी निर्णय को ले पा रही हैं। उनके शिक्षित होने से वह अपने बच्चों को भी अच्छी शिक्षा और संस्कार दे पा रही हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनना सिखा रही हैं। अपने बच्चों और परिवार जनों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहती हैं। घर परिवार के सभी सदस्यों का ध्यान रखती हैं। शिक्षित होने के कारण उनमें खुद में आत्म बल आया है।
मगर अभी भी बहुत से ग्रामीण इलाके ऐसे हैं जहां महिलाएं अशिक्षित हैं और उन्हें भी पूर्ण रूप से शिक्षित बनाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। महिलाओं को पढ़ाए जाने के कारण हमारे देश की और समाज की नींव मजबूत बन रही है। तकनीकी क्षेत्र में भी बहुत ज्ञान है महिलाओं को और यही नहीं महिलाएं समाज की सुधार भी बनती जा रही हैं, जो कि एक अच्छी शुरुआत है।
ईश्वर ने भले ही स्त्री को शारीरिक रूप से पुरुष की तुलना में कमजोर बनाया हो, मगर फिर भी वह लक्ष्मी, दुर्गा, काली और सरस्वती का रूप है। भ्रष्टाचार को रोकने में भी समर्थ है। ईमानदार है। वह चाहे हाउसवाइफ हो या कामकाजी, महिला अपने परिवार और देश की भलाई-बुराई को अच्छे से जानती है। ज्यादातर महिलाओं ने अपने पहनावे को बदला है, मगर फिर भी बहुत सी महिलाएं ऐसी भी हैं जो आज भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा को धारण करके भी अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से पूरी लगन से निभा रही हैं।
फिर वह चाहे किसी भी राज्य की महिलाएं क्यों न हों, हमें पूरा यकीन है कि हमारे देश की महिलाएं ही इस देश को विकासशील से विकसित बनाएंगी। लेकिन यह तभी होगा जब उनके आत्मसम्मान को कोई ठेस न पहुंचाए। अतः पुरुषों से विनती है कि वह महिलाओं को किसी से भी कम न समझें। वे उनसे भी अत्यधिक काबिल हैं।
