एजेंट बोले जुगाड़ कर देंगे सिस्टम बोला वापस कर देंगे

करनाल, 30 अक्तूबर: विदेश जाने का सपना देख रहे युवाओं पर ‘डीपोर्टेशन’ का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है बल्कि कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में भी युवा जांच के दायरे में हैं। अब तक अमेरिका से दो हजार से अधिक भारतीय युवाओं को वापस भेजा जा चुका है और आने वाले दिनों में संख्या और बढ़ने की आशंका है। अमेरिका उन लोगों के वीज़ा की समीक्षा कर रहा है जिन्होंने आश्रय के आधार पर नागरिकता या वीज़ा प्राप्त किया था।

**कनाडा में भी सख्ती तेज
कनाडा के अधिकृत इमिग्रेशन अटॉर्नी, पूर्व प्राचार्य एवं केड इमिग्रेशन के संचालक डॉ. अरविंद कादियान ने बताया कि कनाडा में भी लगभग दो हजार युवाओं को पहले ही डिपोर्ट किया जा चुका है। 48 हजार लोगों की सूची तैयार की गई है जिनमें से सात हजार की पहचान हो चुकी है। इनमें से करीब 2800 युवाओं को नोटिस जारी हो चुके हैं।
डॉ. कादियान के अनुसार, यूके में भी करीब 20 हजार भारतीय युवाओं पर डिपोर्टेशन की तलवार लटक रही है। उन्होंने कहा कि यह हालत ज्यादातर उन युवाओं के कारण बन रही है जो शॉर्टकट अपनाकर फर्जी दस्तावेज़, गलत जानकारी और झूठे उत्पीड़न के आधार पर वीज़ा लेते हैं। जांच में सच सामने आने पर कार्रवाई तय होती है।

**सही रास्ते से वीज़ा लें – अटॉर्नी
उन्होंने सलाह दी कि वीज़ा प्रोसेस केवल अधिकृत और मान्यता प्राप्त इमिग्रेशन अटॉर्नी के माध्यम से ही पूरी करनी चाहिए। जो युवा सही प्रक्रिया से वीज़ा लेते हैं, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और उनका भविष्य सुरक्षित रहता है।
डॉ. कादियान ने यह भी कहा कि सरकार को अवैध एजेंटों पर सख्ती करनी चाहिए और युवा भी विदेश की तैयारी करते समय संबंधित देशों की आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर अधिकृत सलाहकारों की सूची अवश्य जांचें। भारत और राज्य सरकारें भी लाइसेंस प्राप्त एजेंटों के माध्यम से श्रमिकों को विदेश भेजती हैं, इसलिए युवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है।