शुगर मिल ने की कैश क्रेडिट लिमिट के लोन की पूर्ण अदायगी अदिति
करनाल, 8 नवम्बर: सहकारी चीनी मिल की प्रबंध अदिति ने बताया कि 3500 टीसीडी नई रिफाइंड शुगर मिल ने 8 अप्रैल 2021 से अपना पिराई सत्र आरम्भ किया था। तब से लेकर अभी तक इस मिल ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
इस मिल का घाटा जो कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 105.33 करोड़ रुपए था, उसको घटा कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 53.51 करोड़ रुपए कर दिया है और यदि हरियाणा सरकार द्वारा दिए गए लोन का ब्याज व मशीनरी चिसावट को हटा दिया जाए तो यह मिल वित्तीय वर्ष 2024-25 में 12.72 करोड़ रुपए के रोकड़ लाभ पर है।
उन्होंने बताया कि यह हरियाणा राज्य की एक मात्र कॉपरेटिव मिल है जो पिछले कई वर्षों से तीन दिनो के अंदर गन्ने का भुगतान कर रही हैं। पिछले दो वर्षों से बिना कोई सरकारी मदद के अपने स्तर पर किसानों के गन्ने का सम्पूर्ण भुगतान करती आ रही है। इस मिल द्वारा कॉपरेटिव बैंक से जो लोन के रूप में किसानों ने सीजन 2024-2025 के गन्ने के भुगतान के लिए लिया था। वह भी सम्पूर्ण वापिस जमा करा दिया है।
दूसरी तरफ जहां इस मिल को मशीनरी के रखरखाव का खर्चा तथा कर्मचारियों को वेतन देने में भारी परेशानी का सामना करना पडता तथा उसके लिए लोन लेना पडता था, वहीं अब इस मिल ने 5.00 करोड़ की अनुमति ले ली है। जो कि मिल चलने से पहले लगभग 15.00 करोड़ तक की होने की संभावना है और यह सब सम्भव हो पाया है हमारे 18 मेगावाट को-जनरेशन प्लांट से उत्पादित बिजली बेचने 4000 रुपए प्रति कि0. ओस्ताना से भी अधिक रेट पर चीनी व 1250 रुपए प्रति कि0 ओस्तन से भी अधिक शीरा बेचे जाने व खर्चे में पर्याप्त कमी के कारण।
उन्होंने बताया कि यह मिल हरियाणा प्रदेश की सबसे अधिक रेट पर 6.35 के हिसाब से बेचने वाली एक मात्र मिल है, जिससे मिल को सीजन के दौरान बिजली बेचे जाने से 24 से 25 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होती है। इस मिल ने तकनीकी दक्षता में भी बेहतरीन कार्य किया है और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर लगातार तीन बार तकनीकी दक्षता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाली हरियाणा राज्य की पहली मिल बन गई है।
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