भट्ठों में कोयले के साथ जलेगी पराली, बदनपुर भट्ठा बना मिसाल - डी.सी.

समाना/पटियाला, 9 नवंबर - कोयले के साथ-साथ ईंट भट्ठों में ईंधन के रूप में पराली बायोमास पैलेट्स का उपयोग करने से न केवल पराली की समस्या का समाधान होगा बल्कि भट्ठों की लागत भी कम होगी। इसका खुलासा डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने समाना-चीका रोड पर गांव बदनपुर में पराली से बायोमास पैलेट बनाने वाली कंपनी गोयल ब्रिक्स ट्रेडर्स एंड एसपीएस पर्यावरण अनुकूल ईंधन का दौरा किया। उनके साथ एस.डी.एम. समाना चरणजीत सिंह भी मौजूद थे।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार के निर्देशों के अनुसार पर्यावरण संरक्षण के लिए ईंट भट्ठों में कोयले के साथ-साथ पराली के 20 प्रतिशत बायोमास पैलेट्स का उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये छर्रे बहुत सफल हैं क्योंकि उन्होंने खुद इस ईंट भट्ठे का निरीक्षण किया है और पाया है कि कोयले की तुलना में पुआल के छर्रे ज्यादा अच्छे से जलते हैं और इसमें पूरी सफलता मिली है. यहां बनी ईंट की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है। साक्षी साहनी ने कहा कि कोयले की 15 रुपये की तुलना में छर्रों की कीमत 9 रुपये है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है क्योंकि यह हमारे किसानों की पराली भंडारण की समस्या का भी समाधान करती है। उन्होंने सभी भट्ठा मालिकों को एक बार बदनपुर के इस मॉडल ईंट भट्ठे का दौरा करने और पैलेट ईंधन की जांच करने और इसे अपने भट्ठों में उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया।
इस मौके पर भट्ठा मालिक राजीव शांति, मुनीष कुमार व अजय कुमार ने उपायुक्त को भट्ठे के संपूर्ण प्रदर्शन की जानकारी दी और कहा कि यह प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चल रहा है और पराली के स्थायी समाधान के साथ-साथ लागत भी कम हुई है.