छह दशक का इंतजार, और अभी भी करनाल में विकास की कहानी अधूरी !
करनाल, 26 सितंबर: उत्तर हरियाणा के अधिकारों की लड़ाई पिछले 25 वर्षों से लड़ रहे अधिवक्ता राजकुमार शर्मा ने कहा है कि उत्तर हरियाणा से चुने गए दो विधायकों के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी इस क्षेत्र को भेदभाव और शोषण से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
उन्होंने बताया कि करनाल से दो-दो विधायक मुख्यमंत्री बने, लेकिन करनाल और इसके आसपास के क्षेत्र के लोगों को रोहतक, हिसार और सिरसा के समान विकास कार्यों की सौगात नहीं मिली। यह बात उन्होंने पत्रकारों से साझा की।
राजकुमार शर्मा ने 2004 में करनाल-पानीपत से लोकसभा का चुनाव “एकता शक्ति” पार्टी से लड़ा था। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के लोगों के अधिकारों की लड़ाई के लिए उन्होंने एकता शक्ति पार्टी के गठन में सहयोग किया था। हालांकि, बाद में यह पार्टी राजनीति की भेंट चढ़ गई।
शर्मा ने कहा कि हरियाणा के गठन के समय से ही यह क्षेत्र पिछड़ेपन का शिकार रहा है। उन्होंने बताया कि करनाल और कुरुक्षेत्र में हरियाणा की राजधानी बनने की संभावनाएं हैं और यहां हाईकोर्ट भी स्थापित किया जा सकता था। लेकिन कमजोर राजनेताओं के कारण इस क्षेत्र के अधिकारों को छीना गया।
उन्होंने बताया कि करनाल में न तो मेडिकल यूनिवर्सिटी पूरी बन पाई और न ही हवाई अड्डा बन सका। मेडिकल कॉलेज के नाम पर यहाँ केवल दिखावा किया गया, जबकि सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के नाम पर मजाक बना दिया गया। रैरा कोर्ट के लिए अधिसूचना भी जारी की गई, लेकिन अभी तक कोर्ट स्थापित नहीं हुआ।
शर्मा ने कहा कि करनाल और कुरुक्षेत्र में पर्यटन और उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन करनाल को अभी तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि करनाल के राजनेता केवल वोट के लिए इस क्षेत्र का इस्तेमाल करते हैं और चुनाव के बाद क्षेत्र की तरफ ध्यान नहीं देते।
उन्होंने नायब सिंह सैनी में संभावनाएं देखी और कहा कि यदि उन्हें उचित समर्थन और दबाव से मुक्ति मिल जाए तो वह बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
शर्मा ने सुझाव दिया कि सरकार और निर्वाचन आयोग को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में चुनाव लड़ने की पात्रता वहीं के स्थानीय व्यक्तियों को ही देनी चाहिए, ताकि वे अपने क्षेत्र के प्रति समर्पित रह सकें।
