एलांते बचाओ चंडीगढ़ के गौरव की रक्षा के लिए नागरिकों की भावनात्मक अपील

चंडीगढ़, 4 नवंबर: यू.टी. प्रशासन द्वारा एलांते मॉल पर कार्रवाई करने के फैसले ने शहर के नागरिकों में गहरी निराशा और असंतोष पैदा कर दिया है। इस निर्णय के विरोध में शहर के प्रख्यात चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रेम गर्ग ने प्रशासन से एक भावनात्मक अपील की है: “एलांते बचाओ, चंडीगढ़ का गौरव बचाओ।”
प्रेम गर्ग का कहना है कि एलांते मॉल केवल एक शॉपिंग सेंटर नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक धड़कन बन चुका है। यह उत्तर भारत के सबसे सुंदर, सुव्यवस्थित और स्वच्छ वाणिज्यिक स्थलों में से एक है, जिसने शहर को आधुनिक पहचान दी है।
उन्होंने कहा कि जहाँ नागरिक पहले से ही प्रशासनिक अव्यवस्थाओं से परेशान हैं, वहाँ प्रशासन का ध्यान उस एकमात्र सुव्यवस्थित स्थल पर कार्रवाई करने की ओर केंद्रित होना न केवल निराशाजनक बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। “एलांते ने कभी भी किसी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया, न ही किसी को कोई असुविधा पहुंचाई,” उन्होंने कहा।
मॉल हर महीने करोड़ों रुपये का जीएसटी योगदान देता है और हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। इसके अलावा कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों, कॉर्पोरेट कार्यालयों और विदेशी दूतावासों के दफ्तर भी यहीं से संचालित होते हैं, जिससे यह न केवल एक व्यापारिक केंद्र बल्कि पर्यटन और निवेश का भी प्रमुख आकर्षण बन चुका है।
गर्ग ने कहा कि यदि मॉल प्रबंधन ने अपने परिसर के भीतर जनता की सुविधा के लिए कुछ छोटे-छोटे सुधार किए हैं, तो उन्हें “उल्लंघन” कहना अनुचित है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि प्रशासन को वाकई अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्ती दिखानी है, तो उसे अपने ही नियंत्रण वाले क्षेत्रों जैसे सुखना झील परिसर में बने अनधिकृत ढांचे और खाने-पीने की दुकानों से शुरुआत करनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी चयनात्मक कार्रवाई से प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और जनता का विश्वास कमजोर होता है। एलांते मॉल अब उत्तर भारत का एक प्रमुख पर्यटन और निवेश आकर्षण बन चुका है, और इसे क्षति पहुँचाना चंडीगढ़ की आधुनिक छवि तथा आर्थिक प्रतिष्ठा दोनों को आघात पहुँचाएगा।
प्रेम गर्ग ने अंत में प्रशासन से विनम्र अनुरोध किया: “हम सबकी भावनाएं एलांते से जुड़ी हैं। यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की शान है। कृपया इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और इस सुंदर संपत्ति का कोई भी हिस्सा न तोड़ा जाए। इसे बचाना हम सबका कर्तव्य है।”