पंजाब का विकास ठप: अधूरे वादे, रुकी हुई परियोजनाएँ और कर्मचारी संकट में

चंडीगढ़- यह आश्चर्यजनक है कि पंजाब आज भारी बुनियादी ढाँचे और वित्तीय संकट से जूझ रहा है, फिर भी विकास की माँग कहीं सुनाई नहीं दे रही है।
वर्तमान पंजाब सरकार ने अगले पाँच वर्षों में 20 से ज़्यादा नए मेडिकल कॉलेज बनाने का वादा किया था। हकीकत यह है कि पिछली सरकारों द्वारा स्वीकृत होशियारपुर और कपूरथला में दो मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास भी नहीं हो पाया। सरकारी भुगतान के लंबे बकाया और अधूरे वादों के कारण ठेकेदार भी काम करने को तैयार नहीं हैं।
राज्य के राजमार्ग भी बदहाल हैं। राज्य के राजमार्ग, जिनका रखरखाव पहले टोल प्रणाली के माध्यम से होता था, दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। जब सरकार ने टोल माफ़ी की घोषणा की तो शुरुआत में तो वाहवाही हुई, लेकिन सड़कों की मरम्मत न होने के कारण, गड्ढों और टूटी सड़कों पर यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।
इस बीच, सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों के कर्मचारी भी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पिछले छह महीनों से वेतन जारी नहीं हुआ है, जिससे परिवार मुश्किल में हैं। त्योहारों का मौसम नज़दीक होने के बावजूद, कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी की कोई उम्मीद नहीं है, वे बस अपने बकाया वेतन का इंतज़ार कर रहे हैं।
पंजाब की आर्थिक स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। राज्य पहले से ही लगभग ₹4 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा हुआ है और अगर हालात ऐसे ही रहे, तो 2027 के विधानसभा चुनाव तक यह आंकड़ा ₹5 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार ने पंजाब की इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य का विकास, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियाँ गंभीर संकट में पड़ सकती हैं।