प्रिं बहादर सिंह गोसल को महामानव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
चंडीगढ़:- विश्व पंजाबी प्रचार सभा चंडीगढ़ के सेक्टर-41 (बडहेड़ी) स्थित कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि विश्व साहित्यिक सितारे मंच तरनतारन द्वारा चोहला साहिब में शहीद गदरी बाबा सुच्चा सिंह यादगारी हॉल में आयोजित एक भव्य साहित्यिक समारोह में संस्था द्वारा प्रिं. बहादर सिंह गोसल को “महामानव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें सम्मान चिह्न, एक शॉल, पुस्तकों का सेट और गुलदस्ते भेंट किए गए।
इस अवसर पर पंजाब के प्रमुख साहित्यकारों की उपस्थिति में संस्था के प्रधान सरदार हरभजन सिंह भगऱ्थ ने बताया कि प्रिं. बहादर सिंह गोसल को यह सम्मान साहित्य की झोली में 120 पुस्तकें डालने, एक प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री होने तथा पंजाबी मातृभाषा का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के लिए दिया गया है।
इस अवसर पर उनके साथ विश्व पंजाबी प्रचार सभा के वरिष्ठ उपप्रधान जगतार सिंह जोग, उपप्रधान भुपिंदर भागोमाजरिया, प्रसिद्ध साहित्यकार राजिंदर सिंह धीमान तथा अंतरराष्ट्रीय साहित्यक सथ चंडीगढ़ के प्रधान राजविंदर सिंह गड्डू भी उपस्थित थे। इस अवसर पर विश्व पंजाबी प्रचार सभा के उत्कृष्ट गायक जगतार सिंह जोग और भुपिंदर भागोमाजरिया का भी विशेष सम्मान किया गया। राजविंदर सिंह गड्डू और राजिंदर सिंह धीमान भी प्रिं. गोसल के साथ अध्यक्ष मंडल में शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि चोहला साहिब में आयोजित इस साहित्यिक सम्मेलन में सरदार सुखविंदर सिंह खारा द्वारा लिखित पुस्तक “पिंड खारा दा इतिहास” का लोकार्पण किया गया और क्षेत्र के प्रसिद्ध कवियों और गीतकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में रंग भर दिया। वहीं चंडीगढ़ से पहुंचे जगतार सिंह जोग ने विशेष रूप से प्रिं. गोसल रचित दो गीत — “दूध पींदे काढ़नी दा, पहला सूरे वीर पंजाबी – लग पीछे नशਿਆਂ दे करदे फिरदे सेहत खराबी” और “छेती घर आ मर जानिया” — अपनी बुलंद आवाज़ में गाकर समां बांध दिया।
अन्य कवियों में चंडीगढ़ से ही भुपिंदर भागोमाजरिया, राजिंदर धीमान, बलबीर सिंह बेेली, दर्शन कमल, दलजीत सिंह बूटा गुलामी वाला, राकेश सचदेवा, रघबीर सिंह आनंद, गीतकार मख्खन भैणी, राजवंत सिंह बागड़िया और अन्य शामिल थे।
प्रिं. गोसल ने पंजाब की एक बड़ी साहित्यिक संस्था द्वारा दिए गए सम्मान के लिए साहित्यिक मंच तरनतारन का धन्यवाद किया और साहित्यकारों से नए पाठक और अधिक लेखक तैयार करने के लिए प्रयास करने की अपील की। यह एक भव्य साहित्यिक सम्मान समारोह सिद्ध हुआ, जिसकी अगुवाई संस्था के प्रधान सरदार हरभजन सिंह भगऱ्थ द्वारा की गई।
