ऑनस्क्रीन पेपर मार्किंग बनी अध्यापकों के लिए सिरदर्द

26 मार्च, चंडीगढ़- डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) ने पंजाब स्कूल सिख्या बोर्ड द्वारा वार्षिक परीक्षा 2026 के सोशल सिख्या विषय की ऑनस्क्रीन पेपर मार्किंग कराए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सिख्या बोर्ड ने पेपर की हार्ड कॉपियां मूल्यांकन केंद्रों में भेजने से बचने के लिए अध्यापकों की आईडी में ऑनलाइन पेपर भेजकर मूल्यांकन करने के निर्देश जारी किए हैं। डीटीएफ ने मांग की है कि इस प्रणाली को तुरंत बंद कर पहले से चल रही ऑफलाइन विधि अपनाई जाए।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के राज्य प्रधान विक्रमदेव सिंह, जनरल सेक्रेटरी महिंदर कौर्यांवाली और वित्त सचिव अश्वनी अवस्थी ने बताया कि पंजाब स्कूल सिख्या बोर्ड ने अध्यापकों की आईडी में ऑनलाइन उत्तर पत्रिकाएं भेजकर कंप्यूटर स्क्रीन से देखकर पेपर मार्किंग करने के निर्देश दिए हैं। हार्ड कॉपियों से मार्किंग करने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर खुली सॉफ्ट कॉपियों को देखकर मार्किंग करना न केवल कठिन कार्य है बल्कि आंखों पर भी बुरा प्रभाव डाल रहा है।
इसके अलावा पेपर मार्किंग के बाद अंक सबमिट करने में आ रही समस्याओं के कारण अध्यापकों ने केंद्र संचालकों के पास आपत्ति दर्ज करवाई है कि कई बार तकनीकी दिक्कतों के चलते पूरे पेपर के अंक दोबारा शुरू से भरने पड़ते हैं। अध्यापकों ने डीटीएफ नेताओं को बताया कि उन्हें एक-एक पेपर के अंक तीन बार दर्ज करने पड़ रहे हैं, तब जाकर अंक सबमिट हो पा रहे हैं। इस प्रकार एक पेपर की मार्किंग और उसके बाद अंक सबमिट करने में 40 से 45 मिनट तक का समय लग रहा है।
आगूओं ने कहा कि ऑनस्क्रीन पेपर मार्किंग से गलत मार्किंग की संभावना भी बढ़ेगी, और ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों के भविष्य के साथ होने वाले नुकसान के लिए पंजाब स्कूल सिख्या बोर्ड जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि हार्ड कॉपियों से पेपर मार्किंग करना अध्यापकों का काम है, लेकिन अंकों को ऑनलाइन दर्ज करना और सबमिट करना अध्यापकों का नहीं बल्कि डेटा एंट्री ऑपरेटरों का कार्य है।
डीटीएफ ने स्पष्ट किया कि वह तकनीक के खिलाफ नहीं है, लेकिन बिना कारण अध्यापकों की परेशानी के पूरी तरह विरोध में है। उन्होंने आगे कहा कि पहले से ही पंजाब स्कूल सिख्या बोर्ड द्वारा आठवीं कक्षा की पेपर मार्किंग के लिए कोई राशि नहीं दी जाती और दसवीं कक्षा के लिए दी जाने वाली राशि केवल 7.50 रुपये है, जो बहुत ही कम है, जबकि केंद्रीय बोर्ड द्वारा दी जाने वाली राशि 23.75 रुपये इससे काफी अधिक है।
ऐसी स्थिति में डीटीएफ ने कहा कि वह अध्यापकों पर थोपी जा रही ऑनस्क्रीन मार्किंग को सहन नहीं करेगी और इसे वापस लेने की मांग करती है। नेताओं ने मांग की कि अध्यापकों को पेपर मार्किंग के लिए हार्ड कॉपियां दी जाएं और अंक दर्ज करने का कार्य डेटा एंट्री ऑपरेटरों से करवाया जाए।