अपमान नहीं सम्मान दें वीना चुघ

हरियाणा/हिसार: हमें सिखाती है कि हमें कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और न ही कोई अगर हमारा अपमान करे, तो उसे सहना चाहिए। मगर फिर भी लोग कभी न कभी किसी का भी अपमान कर देते हैं। उसे दोबारा सुधार अपने मन में भारी बातों से किसी के मुंह पर ही उसकी बेइज्जती कर देते हैं। कि अपमान करने वाला नहीं, सम्मान करने वाला व्यक्ति ही बड़े दिल वाला कहलाता है।
कई बार स्कूल के अध्यापक/अध्यापिका उन बच्चों में किसी एक या दो बच्चों की ही गलती बार-बार निकालते हैं और वह भी उनके मित्रों के सामने। अगर वह बच्चा उस पर हंसते हैं, तो वह अपमान का घूंट पीकर रह जाते हैं और कई बार उनके दिल में बात घर कर जाती है जिससे उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसा अक्सर होता ही रहता है, मगर हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम किसी के सामने उसकी गलती पर हंसी न उड़ाएं।
गलती हो जाती है, तो उसे पूरी मेहफिल के सामने बेइज्जत करना या उसे मारना-डांटना सही नहीं है। इससे उसका मनोबल टूट जाता है। बच्चों के साथ भी ऐसा करना ठीक नहीं है। अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की छोटी-छोटी बातों पर उन्हें डांट देते हैं, जिससे बच्चों के मन में डर बैठ जाता है और वह अपनी बात खुलकर नहीं कह पाते।
कई बार माता-पिता बच्चों की तुलना दूसरों से करते हैं, जो कि बिल्कुल सही नहीं है। इससे बच्चे का आत्मविश्वास कम होता है और वह खुद को कमजोर समझने लगता है। हमें हमेशा अपने बच्चों को समझना चाहिए, उन्हें प्यार देना चाहिए और उनकी गलतियों को सुधारने का अवसर देना चाहिए।
आज के समय में बच्चों को प्यार और सम्मान की जरूरत है, न कि डांट-फटकार की। अगर हम बच्चों को सम्मान देंगे, तो वे भी हमें सम्मान देंगे और समाज में अच्छे इंसान बनेंगे।
अगर हम किसी का अपमान करते हैं, तो वह हमारे संस्कारों को दर्शाता है। इसलिए हमेशा दूसरों को सम्मान देना चाहिए और अपनी भाषा व व्यवहार में मधुरता रखनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति हमें अपमानित करता है, तो हमें भी उसे उसी तरह जवाब नहीं देना चाहिए, बल्कि धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। यही एक सच्चे इंसान की पहचान होती है।
इसलिए हमेशा याद रखें — “अपमान नहीं, सम्मान दें।”
वीना चुघ सेवा निवृत्त अध्यापिका एवं अखिल भारतीय सेवा संघ महिला शाखा संस्थापक