ललड़ी में ओबीसीएससीएसटी संघर्ष समिति का शक्ति प्रदर्शन

हरोली/ऊना, 22 फरवरी (नारायण प्रभाकर):- हरोली विधानसभा क्षेत्र के गांव ललड़ी में रविवार को ओबीसी–एससी–एसटी संघर्ष समिति के आह्वान पर न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। सभा में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर सामाजिक एकता और अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने University Grants Commission (यूजीसी) की नीतियों के समर्थन के साथ-साथ 93वें संविधान संशोधन के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग को जोरदार ढंग से रखा।
सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष सौरभ कोण्डल ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज कुंभकर्ण की नींद से जागे और अपने अधिकारों की लड़ाई स्वयं लड़े। उन्होंने कहा कि इस आवाज को विधानसभा तक पहुंचाना होगा और समुदाय को एकजुट होकर सशक्त नेतृत्व का चयन करना चाहिए। सौरभ कोण्डल ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों पर शिक्षा और सामाजिक न्याय की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाज को लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करना होगा।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे संविधान निर्माता B. R. Ambedkar के आदर्शों पर चलते हुए शिक्षा, संगठन और संघर्ष के मार्ग को अपनाएं और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ें।
कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक और विधिक क्षेत्रों से जुड़े कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर अधिवक्ता एवं अम्बेडकर अनुसूचित जाति मोर्चा ऊना के अध्यक्ष नरेश कुमार, महर्षि वाल्मीकि गुरु रविदास यूथ एकता महासभा के प्रधान अमित बाल्मीकि, रवि बस्सी, वलराम महे, हरि चंद संधू, बलवीर चौधरी, हरिदास, कैप्टन अमरिक सिंह, प्रमोद सिंह, फ्लाइंग ऑफिसर पूर्ण चंद, अधिवक्ता सारथी, तरसेम लाल, राकेश भरवाल, कैप्टन चरण दास (शौर्य चक्र), शशि पाल, धर्मपाल, यशपाल चौधरी, सर्वण सिंह, रवि सैनी, दुर्गेश पाल सिंह, रविंदर कुमार, अशोक कुमार, कमल प्रसाद, गगन कुमार, राजेश कुमार, वरिंदर हीर, बलराम महे सहित अन्य संगठनों के सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।
सभा के माध्यम से समुदाय ने स्पष्ट संदेश दिया कि समानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को अब व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए संगठनबद्ध होकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।