एनसीडी देखभाल में नर्सों की अहम भूमिका पीजीआईएमईआर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

चंडीगढ़, 20 जनवरी:- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन (NINE), पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ द्वारा वर्ल्ड एनसीडी फेडरेशन के सहयोग से गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम और प्रबंधन में नर्सों की भूमिका पर आधारित आठवां दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 से 20 जनवरी तक सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कोर्स का विषय “नर्स पेशेवरों को कार्य हस्तांतरण (टास्क शिफ्टिंग)” था, जिसका उद्देश्य एनसीडी देखभाल में नर्सों की बढ़ती भूमिका को उजागर करना था।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नर्सों को एनसीडी की रोकथाम, शीघ्र पहचान और प्रभावी प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए संवेदनशील और सक्षम बनाना था। कार्यक्रम में पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से कुल 110 नर्सों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की अग्रिम पंक्ति की कार्यकर्ता हैं और अस्पतालों के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर भी रोगों की रोकथाम और प्रबंधन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीडी की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास में नर्सें डॉक्टरों के समान भूमिका निभाती हैं।
प्रो. जे.एस. ठाकुर ने वर्ल्ड एनसीडी फेडरेशन की स्थापना और नर्सों सहित स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता निर्माण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
नाइन की प्राचार्य डॉ. सुखपाल कौर ने बताया कि यह इस श्रृंखला का आठवां कोर्स है और आने वाले वर्षों में भी इसे निरंतर आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक नर्सों को एनसीडी के क्षेत्र में सशक्त बनाया जा सके। 
उन्होंने कहा कि नर्सें ही ऐसी स्वास्थ्यकर्मी हैं जो मरीजों के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनके सबसे अधिक संपर्क में रहती हैं, जिससे मरीजों और उनके देखभालकर्ताओं को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरूक करने का यह सर्वोत्तम अवसर होता है।
“भारतीय परिप्रेक्ष्य में नर्स प्रैक्टिशनर” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता डॉ. सुषमा कुमारी सैनी ने की। चर्चा में यह निष्कर्ष निकला कि नर्स प्रैक्टिशनर एनसीडी से पीड़ित लोगों की स्क्रीनिंग, निदान, उपचार की शुरुआत, उपचार की निगरानी और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कोर्स के दौरान हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, सीओपीडी, सीकेडी, मानसिक रोगों तथा जनसंख्या आधारित एनसीडी स्क्रीनिंग जैसे विषयों पर चर्चा की गई। भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा इस कोर्स के लिए 10 सीएनई घंटे और 2 सीएनई क्रेडिट प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने इस पहल को समयानुकूल और अत्यंत प्रासंगिक बताया।