अब तो हाई कोर्ट दो सरकार हरियाणा के लोगों की न्याय वाली मांग

करनाल, 25 अक्तूबर: हरियाणा के लोग पिछले 58 वर्षों से अपनी अलग राजधानी और हाई कोर्ट की स्थापना का इंतजार कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर "हरियाणा बनाओ अभियान" के तहत प्रदेशभर में चल रहे जनजागरण अभियान का अगला पड़ाव आज करनाल पहुँचा। इस अवसर पर प्रदेश के वकीलों और बुद्धिजीवियों ने संयुक्त रूप से राज्य के लिए अलग राजधानी और स्वतंत्र उच्च न्यायालय की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. चोपड़ा ने कहा कि हरियाणा को पंजाब से अलग हुए 58 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक राज्य को अपनी अलग राजधानी और उच्च न्यायालय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के नागरिकों को न्यायिक और प्रशासनिक सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
राज्य की राजधानी एक छोर पर होने के कारण आम नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों और उच्च न्यायालय तक पहुँचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और हजारों रुपये टोल शुल्क के रूप में खर्च करने पड़ते हैं।
रणधीर सिंह, पूर्व अध्यक्ष, बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा ने कहा कि हरियाणा को न केवल अपना हाई कोर्ट चाहिए, बल्कि पंजाब से अलग बार काउंसिल भी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए हरियाणा सरकार के वार्षिक बजट में विशेष प्रावधान किए जाने और अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम के तहत सेवानिवृत्ति लाभ लागू करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अधिनियम के तहत अलग बार काउंसिल के गठन के लिए हरियाणा का अपना उच्च न्यायालय होना आवश्यक है। रिकॉर्ड के अनुसार हरियाणा के जिलों और अधीनस्थ न्यायालयों में 14,25,047 से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि 4.5 लाख से अधिक मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। अनुमान है कि लगभग 45 लाख से अधिक लोग मुकदमेबाजी से प्रभावित हैं। इस स्थिति में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग उच्च न्यायालय होना जरूरी है।
जयप्रकाश कंबोज, पूर्व अध्यक्ष, उपभोक्ता आयोग ने कहा कि आज हरियाणा की सबसे गंभीर समस्या बेरोजगारी है। उन्होंने कहा कि नई राजधानी के निर्माण से प्रदेश में भारी निवेश आएगा और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की तरह ही राजधानी में भी विदेशी और निजी निवेश से नई नौकरियों के द्वार खुलेंगे।
 इस अवसर पर रणधीर सिंह (संयोजक) के साथ नरेश डडवाल (एडवोकेट), डॉ. सुमित संधू (पूर्व चेयरमैन, सहकारी बैंक), डॉ. श्रीकृष्ण कुमार देशवाल (महासचिव, रालोद हरियाणा), धर्मबीर सिद्धू (सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट), सुरेश कंबोज (करनाल एडवोकेट), डॉ. रामजी लाल (पूर्व प्रिंसिपल, दयाल सिंह कॉलेज करनाल), भारत भूषण एडवोकेट, यादविंदर सिंह श्योराण, शुभम शर्मा, रविकांत, रजिंदर प्रसाद, रिया मलिक, अनुकृति शर्मा, और प्रमोद भारद्वाज एडवोकेट उपस्थित रहे।