नायब सैनी जिसने हरियाणा जीता बिहार भी फतह कर लिया

करनाल, 15 नवंबर:- हरियाणा की राजनीति में पिछड़े वर्ग से उभरे नायब सिंह सैनी आज भाजपा की रणनीतिक सफलता का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरे हैं। संगठन में उनकी मजबूती, जनसंपर्क क्षमता और जमीन से जुड़े स्वभाव ने न केवल हरियाणा की राजनीति की दिशा बदली, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय चुनावी समीकरणों को भी मजबूत किया। प्रदेशाध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री और अब बिहार चुनावों में उनकी सक्रिय व निर्णायक भूमिका ने उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद बना दिया है।
 हरियाणा का प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही सैनी भाजपा के रणनीतिकारों—विशेषकर अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी—की योजना के केंद्र में रहे। पिछड़े वर्ग को राजनीतिक रूप से सक्रिय और संगठित करने की जो रणनीति भाजपा और संघ ने तैयार की, उसमें सैनी की भूमिका अहम रही। 1990 के दशक से पीएम मोदी के संपर्क में रहे सैनी ने हमेशा संगठनात्मक कार्यों में अपनी दक्षता साबित की। 
पांच राज्यों के चुनावों से पहले नायब सिंह सैनी को हरियाणा भाजपा की कमान सौंपना उनकी पहली बड़ी परीक्षा थी। उनके नेतृत्व में इन राज्यों में पिछड़ा वर्ग तेजी से भाजपा के पक्ष में गोलबंद हुआ। इसका सीधा परिणाम मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भाजपा की व्यापक जीत के रूप में सामने आया। लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया, जहाँ उन्होंने अपनी सहज और मिलनसार शैली से हारती हुई बाजी को जीत में बदल दिया। 
मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जनता के लिए आवास के द्वार खोलकर खुद को एक जननेता के रूप में स्थापित किया।  हरियाणा में लोकप्रियता हासिल करने के बाद सैनी को बिहार विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। हाईकमान के निर्देश पर उन्होंने कई जिलों में चुनावी सभाएँ कीं और व्यक्तिगत जनसंपर्क कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनकी खासियत रही कि उन्होंने बिहार की स्थानीय बोली और लहजे में संवाद करके लोगों से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाया। 
चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने भोजपुर जिले में अयह, तयड़ी; रोहतास जिले में डेहरी; गया जिले में वजीरगंज व गौरा; औरंगाबाद जिले के गोह; पश्चिम चंपारण के बगाहा और पूर्वी चंपारण के रामनगर विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया। इस दौरान हरियाणा से बड़ी संख्या में नेताओं की एक टीम लगभग एक माह तक उनके नेतृत्व में बिहार में सक्रिय रही। 
दिलचस्प यह रहा कि व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बावजूद सैनी ने हरियाणा के कार्यों को भी पूरा समय दिया। वहीं हरियाणा भाजपा की दो टीमों ने समानांतर मोर्चा संभाला—एक बिहार में बिहारी मूल के मतदाताओं को साधने में लगी रही, जबकि दूसरी हरियाणा में जनसंपर्क कर रही थी। बिहार में वोट डालने वाले हरियाणा के निवासियों को विशेष ट्रेनों के माध्यम से मतदान के लिए भेजा गया।