बायोई3 3 पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ने उद्योगतैयार जैवविनिर्माण की दिशा में भारत की प्रगति को किया रेखांकित
एस.ए.एस. नगर मोहाली, 31 अगस्त:- “बायोई3 (BioE3) — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी: उद्योग-तैयार जैव-विनिर्माण के विस्तार को सक्षम बनाना” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन आज जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार परिषद–राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव-प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआरआईसी-एनएबीआई), मोहाली में किया गया। यह आयोजन परिवर्तनकारी बायोई3 (BioE3) नीति के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। कॉन्क्लेव में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नवोद्यमों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया तथा भारत के जैव-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और वैज्ञानिक नवाचारों को उद्योग-तैयार जैव-विनिर्माण समाधानों में परिवर्तित कर बड़े स्तर पर लागू करने में तेजी लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में जैव-प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। चर्चा में कृषि, स्वास्थ्य सेवा, स्थिरता, कार्बन ग्रहण एवं उपयोग, जैव-आधारित उत्पादों और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया।
कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जितेंद्र सिंह, माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार उपस्थित रहे। प्रो. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), महानिदेशक, जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार परिषद (बीआरआईसी), तथा अध्यक्ष, जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बिराक) भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम प्रो. अश्वनी पारीक, कार्यकारी निदेशक, बीआरआईसी-एनएबीआई, मोहाली, डॉ. संगीता एम. कस्तूरे, प्रमुख, जैव-विनिर्माण निदेशालय, डीबीटी तथा डॉ. धनंजय के. तिवारी, प्रबंध निदेशक, बिराक की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया।
कॉन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण “ग्रीन फोर्ज – कल की फसलों को आकार देना” का उद्घाटन रहा। इसमें नियंत्रित-पर्यावरण प्रौद्योगिकियों, जैव-प्रौद्योगिकी और उन्नत अनुसंधान दृष्टिकोणों के माध्यम से अगली पीढ़ी के कृषि समाधानों को विकसित करने की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए प्रो. राजेश एस. गोखले ने भारत के जैव-प्रौद्योगिकी के एक नए युग की ओर बढ़ने को रेखांकित किया, जहां जैविक प्रणालियों का कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, संवेदकों, रोबोटिकी और उन्नत विनिर्माण के साथ तेजी से एकीकरण हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह समन्वय प्रोग्राम योग्य जैव-विनिर्माण, स्मार्ट जैव-कारखानों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित जैव-कारखानों, सटीक उपचार, जलवायु-स्मार्ट कृषि और चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था मंचों को सक्षम बना सकता है।
कॉन्क्लेव में बायोई3 (BioE3) के अंतर्गत नवाचारों को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए सार्वजनिक–निजी साझेदारियों को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। चर्चा में ऐसे तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया जो अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के बीच की दूरी को कम कर सकें तथा संभावनाशील प्रौद्योगिकियों को औद्योगिक स्तर तक पहुंचाने में सक्षम बनाएं।
डी.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायोई3 (D.E.S.I.G.N. for BioE3) पहल के अंतर्गत युवा नवोन्मेषकों को भी सम्मानित किया गया। दिसंबर 2025–अप्रैल 2026 चक्र की 36 विजेता टीमों को योग्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जबकि जनवरी–मार्च 2026 चक्र के 28 विजेता समाधानों को ₹1 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। विद्यार्थियों ने माननीय मंत्री के साथ संवाद भी किया और डी.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायोई3 (D.E.S.I.G.N. for BioE3) के अंतर्गत अपनी विजेता नवाचारों के बारे में जानकारी साझा की तथा जैव-प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों को आगे बढ़ाने संबंधी अपने विचारों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में जैव-कारखाने के लिए एक संवादात्मक मंच तथा भारत–एचई कार्यक्रमों के अंतर्गत सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) की प्रमुख परियोजना — जैव-एसएएफ और जैव-स्मार्ट — के शुभारंभ एवं घोषणा भी की गई।
अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बीआरआईसी-एनएबीआई को कॉन्क्लेव की मेजबानी के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भारत की जैव-प्रौद्योगिकी क्रांति का अग्रदूत बनकर उभरेगा। उन्होंने ग्रीन फोर्ज की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रकाश, आर्द्रता और तापमान सहित अत्यंत नियंत्रित पर्यावरणीय परिस्थितियों को पुनः निर्मित कर उन्नत कृषि अनुसंधान को सक्षम कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ एकीकृत करने से कृषि और संबद्ध विज्ञानों में नवाचार की गति को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने युवा नवोन्मेषकों की भागीदारी की भी सराहना की और उनके उत्साह एवं अभिनव कार्य को नए भारत के उदय की मजबूत संभावना बताया।
कॉन्क्लेव ने बीआरआईसी-एनएबीआई की उन्नत अनुसंधान सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान किया। इसके अंतर्गत परम स्मृति सुपर कंप्यूटिंग सुविधा, डीबीटी स्पीडी-सीड्स तथा जैव-कारखाना (कृषि-खाद्य जैव-मग) का दौरा कराया गया। इस दौरे के दौरान प्रतिभागियों को उन्नत कंप्यूटिंग, कृषि अनुसंधान और जैव-विनिर्माण बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में संस्थान की क्षमताओं का अवलोकन कराया गया।
विचार-विमर्श ने एक मजबूत और विस्तार योग्य जैव-विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, उद्योग और नीति को आपस में जोड़ने के महत्व की पुनः पुष्टि की। कार्यक्रम का समापन गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण सिफारिशों के साथ हुआ, जिन्होंने सहयोग को मजबूत करने और जैव-विनिर्माण नवाचारों के विस्तार में तेजी लाने के लिए एक स्पष्ट दिशा निर्धारित की।
