विधानसभा में विधायक डॉ ईशांक कुमार ने उठाया 20 का मुद्दा
होशियारपुर:- पंजाब विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान चब्बेवाल के विधायक डॉ. ईशांक कुमार ने केंद्र सरकार की E20 ईंधन नीति को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस नीति का प्रभाव आम उपभोक्ताओं, किसानों, जल संसाधनों तथा ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ सकता है और सरकार को इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
डॉ. ईशांक कुमार ने कहा कि जब E20 को लेकर लोगों ने अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, तब सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय ध्यान भटकाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जब जनता की आवाज़ नहीं सुनी गई, तब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने स्वयं इस मुद्दे को उठाया और इसे राष्ट्रीय स्तर पर लोगों के बीच ले गए। उन्होंने सदन को बताया कि E20 के विरोध में देशभर में राष्ट्रीय टाउनहॉल अभियान चलाया गया, जिसमें 2 लाख से अधिक लोगों ने याचिकाओं पर हस्ताक्षर किए, जबकि 7 लाख से अधिक लोगों ने टाउनहॉल की लाइव स्ट्रीम के माध्यम से भागीदारी की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि यह केवल किसी एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
डॉ. ईशांक कुमार ने कहा कि सरकार ने E20 लागू करने के पीछे पेट्रोल सस्ता होने का तर्क दिया था, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रही और लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि E20 ईंधन उन वाहनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है जो इस तकनीक के अनुरूप तैयार नहीं किए गए हैं, जिससे करोड़ों वाहन मालिकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। डॉ. ईशांक कुमार ने यह भी कहा कि सरकार ने ऑटोमोबाइल उद्योग को E20 के अनुरूप ढलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया। इससे पुराने वाहनों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हुई है और उपभोक्ताओं के साथ-साथ ऑटोमोबाइल उद्योग को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से कृषि पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है तथा पानी की खपत में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे भविष्य में जल संकट और खाद्यान्न उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने पेपर लीक जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश का नागरिक हर स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाली नीतियों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया जाए तथा जनता द्वारा उठाए गए सभी सवालों का संतोषजनक उत्तर दिया जाए।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. ईशांक कुमार ने सदन में प्रस्तुत प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो किसानों, उपभोक्ताओं और देश के आर्थिक एवं पर्यावरणीय हितों की रक्षा करें।
