सफाई कर्मचारियों द्वारा दिए गए बंद के आह्वान को बठिंडा में मिला जुला समर्थन
बठिंडा, 30 जुलाई 2026: कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज के मामले को लेकर आज सफाई कर्मचारियों द्वारा दिए गए पंजाब बंद के आह्वान को आज बठिंडा में मिला जुला समर्थन मिला। पर जिले के कई कस्बों और शहरों में बंद को भरपूर और कुछ में आंशिक समर्थन की रिपोर्टें हैं। सफाई कर्मचारियों के इस बंद का कांग्रेस, भाजपा, शिरोमणि अकाली दल समेत अन्य सियासी पार्टियों के अलावा भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां), मजदूर जत्थेबंदियों और कर्मचारी यूनियनों ने भी समर्थन किया है। बाल्मीकि समाज और विभिन्न सामाजिक जत्थेबंदियों के आह्वान पर रखे गए बंद के दौरान बठिंडा के उन बाजारों में दुकानें बंद रहीं जिनमें सफाई कामगारों के रोष मार्च को गुजरना था।
शहर की बाकी जगहों पर कारोबारी अदारे आम तौर पर खुले दिखाई दिए। इस बंद का आह्वान सुबह 9 बजे से 2 बजे तक का था और बंद की समाप्ति उपरांत दुकानें आम तौर पर खुल गईं। इस दौरान स्कूल, कॉलेज, डॉक्टरी सेवाएं और अन्य जरूरी सेवाएं आम तौर पर ही जारी रहीं।
सफाई कर्मचारी अपनी लंबे समय से लटकती मांगों को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में 3 साल की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना शामिल है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज और पिटाई करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी की गई।
बरनाला पुलिस द्वारा 22 जुलाई को सफाई सेवकों पर लाठीचार्ज के बाद सियासी माहौल भड़कने के कारण बंद करवाने वाली धिरों का मिजाज भी तीखा रहा।
प्रदर्शनकारियों ने बठिंडा के अलग अलग बाजारों में रोष मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की और डीएसपी का पुतला फूंका। इस मौके मीडिया के साथ बातचीत करते हुए सफाई सेवकों के नेता वीर भान और विक्की ने बरनाला में हुए लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी सुबह 5 बजे के करीब शहर की सफाई करते हैं और कोरोनावायरस महामारी जैसे कठिन समय में भी इसे साफ रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मेहनती वर्करों के विरुद्ध लाठीचार्ज किसी भी हालत में जायज नहीं है। मजदूरों ने सूबा सरकार के रवैये, खासकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के बर्ताव को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास में बड़े विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, मुख्यमंत्री ने अभी तक इस मुद्दे पर किसी भी संवेदनशीलता के साथ जवाब नहीं दिया है, जिसके कारण व्यापक जन रोष है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक पार्टी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सफाई कर्मचारियों के मान और अधिकारों के लिए है। नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार उन्हें स्थायी रोजगार नहीं देती, वह आने वाले दिनों के दौरान संघर्ष को और भी तीखा करेंगे।
