बर्खास्त चपरासी द्वारा करोड़ों की महाठगी बठिंडा पुलिस ने कसा शिकंजा

बठिंडा, 28 जुलाई 2026:- सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर ठगियां तो अक्सर चर्चा में आती रहती हैं पर बठिंडा में टोल प्लाजा के आवंटन के लिए 7 करोड़ की महाठगी का मामला सामने आया है। इस हैरान करने वाले मामले में दोषियों ने यहां न केवल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के नाम का दुरुपयोग किया बल्कि महकमे के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए, नकली अफसर बनाए और फर्जी दस्तावेजों के जरिए दिल्ली के कारोबारी के साथ 7.04 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। 
बड़ी बात यह है कि इस महाठगी का मुलजिम कोई और नहीं बल्कि एनएचएआई का बर्खास्त चपरासी राकेश गोयल है। थाना थर्मल पुलिस ने राकेश गोयल, उसकी पत्नी, साले, जीजा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस तफ्तीश के दौरान इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।
फिलहाल मुलजिम फरार बताए जा रहे हैं जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापे मार रही है। यहां यह भी जिक्र करना किसी दिलचस्पी से कम नहीं होगा कि दो दिन पहले ही इसी राकेश गोयल के खिलाफ टोल प्लाजा के टेंडर दिलाने के नाम पर 2 करोड़ 40 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज हुआ था और अब यह कांड सामने आ गया है। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता मनीष गुप्ता वासी पहाड़गंज (दिल्ली) शाम क्रिएशन्स नामी फर्म के संचालक हैं। 
उनकी राजस्थान में स्थित खाटूश्याम में बठिंडा वासी राकेश गोयल से मुलाकात हुई थी। तब राकेश गोयल ने खुद को ऊंची पहुंच वाला बताते हुए टोल प्लाजा के टेंडर दिलाने का भरोसा दिलाया था। इस दौरान अपना विश्वास बनाने के लिए राकेश गोयल ने खाटूश्याम, सहारनपुर और दिल्ली में उनके साथ कई मीटिंगें की थीं।
इस मौके पर मुलजिम राकेश गोयल ने एनएचएआई के कथित अधिकारियों से मुलाकात करवाने के अलावा मनीष गुप्ता को फर्जी पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज भी दिखाए। इस दौरान राकेश गोयल ने शिकायतकर्ता की मुलाकात गगन नामी व्यक्ति से करवाई जिसे हाईवे का बड़ा अफसर बताया था। मुलजिमों ने कहा कि इससे पहले वह अग्रवाल एंटरप्राइजेज और बंसल एंटरप्राइजेज को भी टोल के टेंडर दिला चुके हैं इसलिए अगर वह (मनीष गुप्ता) निवेश करे तो उसे हिस्सेदार बना लिया जाएगा। 
इसके बाद बाकायदा फर्जी एग्रीमेंट तैयार किए गए और खुद को सही बताने के लिए गोयल ने बठिंडा स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नाम पर खाता खुलवा लिया। ठगी का शिकार हुए मनीष गुप्ता ने इसी खाते में ही करोड़ों रुपये जमा करवाए थे।
जानकारी के अनुसार मुलजिमों ने विभिन्न मौकों पर मनीष गुप्ता से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की राशि नकद ले ली जो कि राकेश गोयल, उसकी पत्नी शेफाली, साले दविंदर गर्ग, और ड्राइवर गगन ने प्राप्त की थी। इस दौरान दविंदर गर्ग की फर्म एसआर एंटरप्राइजेज में 25 लाख रुपये ट्रांसफर भी करवा लिए। बाकी रकम विभिन्न तारीखों को कई चेकों के माध्यम से वसूली गई। 
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब काफी समय तक उसे कोई टेंडर नहीं मिला तो उन्होंने 31 मई 2026 को अपने पैसे वापस मांगे थे तो मुलजिम अजीबोगरीब हरकतें करने लग पड़े थे। मनीष गुप्ता ग्रीन सिटी रोड पर महेश्वरी कॉलोनी में स्थित राकेश गोयल के घर गया तो उसने पत्नी की मिलीभगत से खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क लिया और आत्मदाह की धमकियां दी थीं।

**पड़ताल उपरांत एफआईआर
थाना थर्मल पुलिस ने इस महाठगी मामले में राकेश गोयल, उसकी पत्नी शेफाली, दविंदर गर्ग, गगन और ड्राइवर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पड़ताल उपरांत दर्ज इस एफआईआर में नामजद व्यक्तियों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है।

**फर्जीवाड़े से बचाव का तरीका
एडवोकेट एमएम बहल का कहना था कि सरकारी टेंडर कभी भी किसी अधिकारी की सिफारिश, व्हाट्सएप मैसेज या निजी एग्रीमेंट के जरिए नहीं दिए जाते बल्कि यह काम अधिकृत ई-टेंडरिंग पोर्टल के जरिए ऑनलाइन और पारदर्शी होता है। उन्होंने बताया कि टेंडर में हिस्सा लेने के लिए रजिस्टर्ड कंपनी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन बोली लगानी होती है। 
उन्होंने किसी भी सरकारी स्कीम या टेंडर के नाम पर किसी निजी व्यक्ति या संदिग्ध खाते में पैसा जमा न करवाने और खुद को सरकारी अफसर बताने वाले का पहचान पत्र, पद और दावों की संबंधित महकमे से पुष्टि करने की सलाह भी दी है।