लुवास ने एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड के साथ किया समझौता ज्ञापन एमओयू हस्ताक्षरित
हरियाणा/हिसार:- लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विकसित तकनीकों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने हेतु एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता आज कुलपति सचिवालय में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान संपन्न हुआ।
एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड,कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित एक प्रमुख सरकारी उपक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में विकसित तकनीकों और शोध परिणामों का व्यावसायीकरण करना तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों तक पहुंचाना है।
इस एमओयू के माध्यम से विश्वविद्यालय में विकसित उपयोगी एवं बाजारोन्मुख तकनीकों का मूल्यांकन कर उन्हें एग्रीइनोवेट के पोर्टफोलियो में शामिल किया जाएगा तथा आवश्यकता अनुसार उनका व्यावसायीकरण एवं लाइसेंसिंग सुनिश्चित की जाएगी। यह पहल कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में नवाचारों के प्रसार और किसानों तक आधुनिक तकनीकों की पहुंच को सुदृढ़ करेगी।
समझौते पर विश्वविद्यालय की ओर से निदेशक (मानव संसाधन प्रबंधन) डॉ. सोनिया सिंधु तथा एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रवीण मलिक ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) विनोद कुमार वर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय में विकसित शोध एवं तकनीकों को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सहयोग से नवाचारों का प्रभावी प्रसार होगा तथा किसानों एवं उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे प्रयास करता रहेगा, जिससे अनुसंधान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
कार्यक्रम के दौरान पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश खुराना तथा पशु चिकित्सा औषधि विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दिव्या अग्निहोत्री भी उपस्थित रहे।
जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. निलेश सिन्धु ने बताया कि यह समझौता विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार क्षमता को नई दिशा प्रदान करते हुए कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
