रिपुदमन सिंह रूप के स्मृति समारोह में हुई भारी सहभागिता

चंडीगढ़- हाल ही में दिवंगत हुए पंजाबी लेखक एवं अधिवक्ता रिपुदमन सिंह रूप की स्मृति में आयोजित समारोह में किसान भवन, चंडीगढ़ में लेखकों, बुद्धिजीवियों, वकीलों, रंगकर्मियों, फिल्म कलाकारों, राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा कर्मचारी नेताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
इस अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव सुखदेव सिंह सिरसा, केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के अध्यक्ष दर्शन बुट्टर, स्तंभकार शाम सिंह (अंग-संग), पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़ के अध्यक्ष दीपक शर्मा चरणार्थल, मोहाली के पूर्व डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी, पूर्व मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, बार काउंसिल के सदस्य दयाल प्रताप सिंह रंधावा, कर्मचारी नेता गुरमेल सिद्धू, नाटककार दविंदर दमन, न्यायमूर्ति दया चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता दविंदर जटाणा, रंगकर्मी डॉ. साहिब सिंह, एडमंटन (कनाडा) की विधायक जसबीर देओल, शायरा कुलविंदर कौमल (दुबई), सी.पी.आई. के पूर्व सचिव बंत सिंह बराड़, इप्टा पंजाब के महासचिव इंद्रजीत रूपोवाली, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन सुख्खी बराड़, सुरिंदर प्रीत घणियां, संयुक्त सचिव डॉ. किरनदीप कौर तथा पौत्र-दामाद उज्ज्वल और मोहित वेद ने कहा कि श्री रूप एक ऐसे वृक्ष थे जो जीवन भर तूफानों में डटे रहे और जनता के पक्ष तथा अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। उन्होंने अपने कर्मचारी साथियों की जायज़ मांगों के समर्थन में अग्रिम पंक्ति में रहकर अनेक बार जेल यात्राएं कीं और सामाजिक मुद्दों को निर्भीकता एवं साहस के साथ उठाया।
वक्ताओं ने कहा कि श्री रूप जहां एक सफल वकील थे, वहीं उन्होंने अपने लगभग 70 वर्षों के साहित्यिक सफर में साहित्य की विभिन्न विधाओं में एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने अपने पिता ज्ञानी ईश्वर सिंह दर्द के निधन के लगभग चार दशक बाद उनकी कविताओं का संग्रह ‘धूल हेठली कविता’ संपादित कर प्रकाशित करवाया।
श्री रूप की अंतिम इच्छा के अनुसार उनके परिवार ने उनका पार्थिव शरीर शोध कार्यों के लिए पी.जी.आई. चंडीगढ़ को समर्पित कर दिया। उनके बड़े भाई, शिरोमणि साहित्यकार संतोख सिंह धीर का शरीर भी वर्ष 2010 में पी.जी.आई. को दान किया गया था। इस अवसर पर पी.जी.आई. प्रशासन द्वारा श्री रूप की देह एवं नेत्रदान के लिए उनके परिवार को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
श्री रूप को श्रद्धांजलि देने पहुंचे विशाल जनसमूह में उनके रिश्तेदारों और निकट सहयोगियों के अलावा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनूप चितकारा, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जसबीर सिंह, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी, पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़ के महासचिव भूपिंदर मलिक, दिनेश गुप्ता (रजिस्ट्रार न्यायिक, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय), जगदीप सिद्धू, पाल अजनबी, जसबीर ढिल्लों, अनीता शब्दीश, नरिंदर नसरीन, करम सिंह धनोआ, बलदेव झज्ज, गुरमेल मौजेवाल, इप्टा चंडीगढ़ के अध्यक्ष बलकार सिद्धू, जसवंत दमन, रजिंदर रोज़ी, बनिंदर बन्नी, सतविंदर धीमान, राबिंदर रब्बी, सुरिंदर रसूलपुरी, राणा सोढ़ी, अवतार कलसियां, अशोक बजहेड़ी, रणजीत हांस, डॉ. नरेंद्र गुप्ता, अधिवक्ता रविंदर सांपला, ए.एस. पाल, बाबू राम दीवाना, कर्नैल सिंह सोमल, नरपिंदर सिंह रंगी, गौरव जैन, सतबीर सिंह धनोआ सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त श्री रूप के दामाद पत्रकार दविंदर दर्शी, पुत्रवधू चरणजीत कौर, पूनम, पौत्रवधू पूर्वा, पौत्री रित्तू राग एवं प्रियराग कौर, तथा पौत्र रिशम राग और उदैराग भी समारोह में शामिल हुए।
श्री रूप के बड़े पुत्र संजीवन सिंह ने बताया कि उनकी तीन पुस्तकें—एक गद्य-संग्रह, कहानियों एवं कविताओं का संकलन तथा एक लघु-उपन्यास—प्रकाशनाधीन हैं और शीघ्र ही पाठकों तक पहुंचेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके जीवन पर आधारित एक वृत्तचित्र ‘मैं रीपा बोलदा’ बनाने की योजना भी है।अंत में उनके छोटे पुत्र रंजीवन सिंह ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद किया।