करनाल का आसमान बना धुआंधार दीपावली पर फूंक दिए करोड़ों

करनाल, 21 अक्तूबर: दीपावली के मौके पर जहां लोगों ने खुशियां साझा कीं और उपहारों का आदान-प्रदान किया, वहीं आतिशबाजी का शौक करनाल पर भारी पड़ गया। एक ही रात में करनाल ने 100 से 300 करोड़ रुपये तक की आतिशबाजी में झोंक दिए। रात भर गूंजते धमाकों की आवाज़ से हृदय रोगी सहमते रहे। आसमान में फैले काले और विषैले धुएं से अस्थमा रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 
करनाल में प्रदूषण का स्तर 184 तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने आने वाले दिनों में बुजुर्गों को सुबह की सैर से परहेज़ करने की सलाह दी है। वहीं, अस्थमा रोगियों को मास्क लगाकर ही बाहर निकलने की हिदायत दी गई है। शहर में देर रात तक पटाखों की गूंज जारी रही। ‘ग्रीन पटाखों’ की आड़ में तेज धमाके और ज़हरीले पटाखों की खुलेआम बिक्री होती रही। सुप्रीम कोर्ट ने केवल दो घंटे तक ही आतिशबाजी की अनुमति दी थी, लेकिन आदेशों की कहीं भी पालना होती नहीं दिखी। 
पिछले लगभग 25 वर्षों से आतिशबाजी और प्रदूषण को लेकर चिंता जताई जाती रही है। हर साल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट प्रदूषण को लेकर सख्ती बरतने की बात करते हैं, लेकिन इसका असर ज़मीनी स्तर पर नहीं दिखता। इस वर्ष भी देशभर में लगभग आठ लाख करोड़ रुपये के पटाखे बिके। करनाल में भी प्रशासनिक आदेशों के बावजूद प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी जारी रही।
 एक अनुमान के अनुसार, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, लेड ऑक्साइड, ओज़ोन तथा अन्य हानिकारक गैसों का स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया। आज दिनभर आसमान में स्मॉग छाया रहा, और सुबह से ही धुंध का आवरण नजर आया। 
इस स्थिति पर प्रसिद्ध छाती रोग विशेषज्ञ डा. नैत्रपाल ने बताया कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने से छाती के रोगों से ग्रस्त लोगों को अत्यधिक परेशानी होती है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा से पीड़ित लोगों को मास्क लगाकर ही बाहर निकलना चाहिए।