जीवो मंगलम जहां टूटे पंखों को फिर मिलती है उड़ान
करनाल, 30 जनवरी:- बसंत पंचमी जहां एक ओर खुशियों, रंगों और पतंगों का त्योहार माना जाता है, वहीं यह पर्व आसमान में उड़ने वाले बेजुबान पक्षियों के लिए किसी आफत से कम नहीं होता। पतंगों की खतरनाक चाइनीज डोर हर साल सैकड़ों पक्षियों को घायल कर देती है, जिनमें से कई जीवनभर के लिए अपंग हो जाते हैं तो कई अपनी जान तक गंवा बैठते हैं।
हरियाणा के करनाल स्थित प्रदेश के एकमात्र पक्षी विहार “जीवो मंगलम” इन घायल पक्षियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यहां पतंग की डोर में फंसकर घायल हुए पक्षियों का इंसानों की तरह इलाज किया जाता है। इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होने पर इन पक्षियों को फिर से खुले आसमान में उड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। बसंत पंचमी के मौके पर पिछले दो दिनों में बड़ी संख्या में घायल पक्षी जीवो मंगलम लाए गए हैं।
इनमें से अधिकतर पक्षियों के पंख पतंग की डोर से कटे हुए थे, जिनका इलाज संस्थान में लगातार किया जा रहा है। गली-मोहल्लों और खुले मैदानों में पड़े घायल पक्षियों को लोग उठाकर यहां तक पहुंचा रहे हैं। संस्थान की केयर टेकर साध्वी ने बताया कि पक्षियों की कई प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि खासतौर पर बसंत पंचमी के दिन बच्चे बड़ी संख्या में पतंग उड़ाते हैं और इसी दौरान पक्षी डोर में फंसकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कई बार तो उनकी मौत हो जाती है या वे जीवनभर उड़ने लायक नहीं रहते। साध्वी ने बताया कि जीवो मंगलम संस्थान ऐसे सभी जीवों के लिए समर्पित है जो किसी दुर्घटना का शिकार होकर उड़ नहीं पाते। यहां घायल पक्षियों का पूरी तरह उपचार किया जाता है और ठीक होने के बाद उन्हें खुले वातावरण में छोड़ दिया जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि पतंगबाजी के दौरान खतरनाक चाइनीज डोर का इस्तेमाल न करें और इस शौक को सीमित रखें। उन्होंने कहा कि हमें अपनी खुशियों की खातिर किसी बेजुबान जीव की जान लेने का कोई अधिकार नहीं है। यदि लोग थोड़ी सी सावधानी बरतें, तो सैकड़ों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है।
