इंदिरा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित किया 12वां विशाल साईं भंडारा
हिसार:- इंदिरा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा हिसार की बरवाला चुंगी के पास स्थापित साईं मंदिर में 12वां विशाल भंडारा पूरे उत्साह के साथ लगाया गया। यह भंडारा केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि सेवा, संस्कार व स्वावलंबन का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। इस भंडारे व धार्मिक आयोजन में 600 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और उन्होंने साईं भोग व कीर्तन में भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया।
इस अवसर पर हिसार नगर निगम के मेयर प्रवीन पोपली ने साईं बाबा के चरणों में भोग अर्पित करके मंदिर में शीश नवाया। उन्होंने भक्ति भाव से प्रार्थना की और कीर्तन में सहभागिता की। इस दौरान इंदिरा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष रजत गुप्ता ने ट्रस्ट की सामाजिक गतिविधियों की जानकारी साझा की।
रजत गुप्ता ने बताया गया कि वर्ष 2015 से अब तक 12 हजार से अधिक बेटियों को निशुल्क कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाया गया है। हर घर उद्यमी मिशन 2030 के तहत 25 हजार बेटियों को सशक्त करने का संकल्प भी समाज के सामने रखा गया है, जो नए भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है। रजत गुप्ता ने सभी अतिथियों व श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब सेवा का उद्देश्य केवल दान नहीं बल्कि किसी के जीवन को बदलना हो, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण होता है।
इस अवसर पर भजन गायक सुमित मित्तल व गायिका देविका की भक्ति-रस से सराबोर प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को साईंमय कर दिया। श्रद्धालु भक्ति और सेवा के इस संगम में भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर सुशील कौशिक, अशोक कौशिक, हरिओम मंगाली वाले, सुमित मित्तल, के.पी. गुप्ता, स्वदेशी जागरण मंच से स्वदेशी मेला प्रमुख अनिल गोयल, सुरेश जाखड़, मनजीत सांगवान, विवेक बिश्नोई, कपिल पंडित, प्रियंका, शिल्पा, मन्नत, थोशानी, सार्थक गुप्ता, साधिका, अंकुश, रवीना, सुशीला, सुखबीर, सतेंद्र जयवीर एवं इंदिरा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।
भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं ने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जब सेवा में साईं का भाव और संकल्प में समाज का उत्थान हो, तब एक छोटी सी पहल भी राष्ट्र निर्माण का आधार बन जाती है। आज जब देश आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर है, ऐसे में इंदिरा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट जैसे प्रयास यह साबित कर रहे हैं कि बदलाव केवल नीतियों से नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर किए गए सच्चे प्रयासों से आता है।
