दरबार बापू गंगा दास जी माहिलपुर में हंस राज हंस हुए नतमस्तक
होशियारपुर:- पूर्व सांसद, प्रसिद्ध सूफी एवं पार्श्व गायक तथा दरबार बापू लाल बादशाह जी, नकोदर के पूर्व मुख्य सेवादार हंस राज हंस ने दरबार बापू गंगा दास जी, माहिलपुर में पहुंचकर माथा टेका तथा संत महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर दरबार के मुख्य सेवादार दास मनदीप सिंह बैंस (मंगा जी) ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों के बीच धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बातचीत के दौरान संत महापुरुषों की शिक्षाओं को समाज में शांति, भाईचारे, मानवता और निस्वार्थ सेवा की भावना को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया गया। दोनों ने समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार दलजीत अजनोहा ने हंस राज हंस का एक विशेष साक्षात्कार भी लिया। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने धर्म, सामाजिक सद्भाव, जनसेवा, समकालीन राजनीति, संगीत और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बेबाकी से अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों की शिक्षाएं मानवता को सत्य, प्रेम, शांति, विनम्रता और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं, जिसकी आज के समय में सबसे अधिक आवश्यकता है।
साक्षात्कार के दौरान जब वरिष्ठ पत्रकार दलजीत अजनोहा ने उनसे उनके राजनीतिक सफर के बारे में पूछा, तो हंस राज हंस ने कहा कि यह उनके जीवन पर ईश्वर की अपार कृपा रही कि उन्हें दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर मिला और जनता ने उन्हें भारी बहुमत से विजयी बनाकर संसद भेजा। उन्होंने कहा कि सांसद के रूप में उन्होंने हमेशा पंजाब के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब के विकास और लोगों की भलाई के लिए जो भी संभव हो सका, उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा पंजाबियत की भावना को अपने हृदय में जीवित रखा है और जहां भी रहे, अपनी मिट्टी, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने लोगों से जुड़े रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंजाब की पहचान उसकी सांझी संस्कृति, भाईचारे और प्रेम की परंपरा है, जिसे हर हाल में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
हंस राज हंस ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने से मन को आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा प्राप्त होती है। ऐसे पवित्र स्थल हमारी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को संजोने के साथ-साथ लोगों को अपने नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रेम, एकता, सामाजिक सद्भाव और निस्वार्थ सेवा की भावना को अपनाकर एक मजबूत एवं समरस समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
हंस राज हंस के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरबार में उपस्थित रही। श्रद्धालुओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया और उनके द्वारा दिए गए शांति, मानवता एवं भाईचारे के संदेश की सराहना की। पूरे कार्यक्रम के दौरान दरबार का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
