तिरुपति धाम में धूमधाम से निकली माता गोदांबा की सवारी शोभा यात्रा

हिसार: दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित श्री तिरुपति बालाजी धाम में पूरे विधि-विधान से माता गोदांबा की पूजा-अर्चना करने के उपरांत सवारी शोभा यात्रा निकाली गई। अर्चकों ने मंत्रोच्चारण के साथ माता गोदांबा के विग्रह को पालकी में विराजमान किया। शोभा यात्रा के लिए पालकी को फूल मालाओं व चुनरी से सजाया गया। इसके साथ ही बहुरंगी छत्र भी सुशोभित किया गया। विधिस्वरूप माता गोदांबा की आराधना करते हुए श्रद्धालुओं ने सवारी को रस्सों से खींचकर तिरुपति धाम की परिक्रमा की। इस दौरान पूरा धाम जय माता गोदांबा, जय तिरुपति धाम व जय भगवान वेंकटेश के उदघोष से गुंजायमान हो उठा। सवारी शोभा यात्रा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं में सात्विक गोष्ठी प्रसाद का वितरण किया जाता है।
    माता गोदांबा को भूदेवी का अवतार माना जाता है। माता गोदांबा का अविर्भाव एक बालिका के रूप में भगवान के परमभक्त श्री विष्णुचित्त के नंदनवन में तुलसी के पौधे की छाया में हुआ। भगवान के प्रति भक्ति और प्रगाढ़ आस्था के चलते माता गोदांबा भगवान विष्णु जी के श्री रंगनाथ स्वरूप में अपने पति-परमेश्वर की छवि देखने लगी। एक वक्त ऐसा भी आया जब भगवान विष्णु जी की अनुकंपा से गोदांबा श्री रंगनाथ में विलीन होकर रंगनायकी बन गई। तिरुपति धाम में माता गोदांबा का मंदिर भी विशेष रूप से स्थापित किया गया है। भगवान तिरुपति मंदिर के साथ ही दक्षिण भारत से लाए गए ग्रेनाइट पत्थरों से इस मंदिर का निर्माण किया गया है। भक्तों की इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था है।
   अग्रोहा रोड पर लांदड़ी टोल प्लाजा के पास स्थापित तिरुपति धाम में निकाली गई माता गोदांबा की सवारी शोभा यात्रा में हिस्सा लेने वाले श्रद्धालुओं ने धाम में श्री वेंकटेश भगवान जी, श्री पद्मावती माता जी, श्री गोदांबा माता जी, श्री गरुड़ जी, श्री लक्ष्मी नृसिंह जी, श्री सुदर्शन जी, श्री रामानुज स्वामी जी, श्री शठकोप स्वामी जी, श्री वरवर मुनि जी एवं श्री हनुमान जी के मंदिरों के भी दर्शन किए। 42 फुट ऊंचे सोने के श्री गरुड़ स्तंभ, बलिपीठम्, श्री तिरुपति यज्ञशाला, श्रीनिवास गोशाला, पवित्र पुष्करणी व 71 फुट ऊंचे गोपुरम के भी भक्तों ने दर्शन किए।