किसानों पर लाठियों की बारिश: श्यामसुख गाँव में गुस्से का तूफ़ान !

करनाल, 2 अक्टूबर: हिसार जिले के श्यामसुख गाँव में किसानों के साथ हुई घटना को लेकर प्रदेशभर में गुस्से का माहौल है। डीएपी खाद लेने पहुंचे सैकड़ों किसान घंटों लंबी कतारों में खड़े रहे, लेकिन प्रशासन खाद वितरण में असफल रहा। इससे मौके पर अव्यवस्था फैल गई। स्थिति सुधारने के बजाय पुलिस ने किसानों पर लाठियाँ बरसाकर हालात और बिगाड़ दिए। 
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अन्नदाता देश की रीढ़ हैं। किसान जब अपनी फसल बचाने के लिए खाद लेने पहुंचे और उन पर सरकार द्वारा लाठियाँ बरसाई गईं, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन है। 
उन्होंने कहा कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए किसानों को निशाना बना रहा है, जो किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि सरकार और प्रशासन की नाकामी का खामियाज़ा हमेशा किसान क्यों भुगते? खाद की कमी और वितरण व्यवस्था की अव्यवस्था किसानों को पहले से ही परेशान कर रही है। ऐसे में उन पर बल प्रयोग करना सीधे तौर पर किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

भारतीय किसान यूनियन की माँगें:
*श्यामसुख गाँव में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की तुरंत उच्चस्तरीय जाँच की जाए।
*दोषी अधिकारियों व पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
*किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और काला बाज़ारी पर रोक लगाई जाए।
*खाद वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि किसानों को लंबी कतारों में धक्का खाने और अपमानित होने से बचाया जा सके।

भाकियू ने दी आन्दोलन की चेतावनी:
रतनमान ने इस मामले में सरकार को दोषी ठहराते हुए मुख्यमंत्री को आन्दोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस घटना का संज्ञान लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो भारतीय किसान यूनियन प्रदेशभर में आंदोलन शुरू करेगी और इसका ज़िम्मेदार सरकार और प्रशासन स्वयं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसान पहले से ही महँगाई, मौसम की मार और बाज़ार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। 
ऐसे समय में पुलिसिया दमन उनकी पीड़ा को और बढ़ा रहा है। सरकार को याद रखना चाहिए कि किसानों की आवाज़ को दबाकर शांति कभी स्थापित नहीं की जा सकती। भारतीय किसान यूनियन ने अपील की कि सभी किसान भाई शांति बनाए रखें, लेकिन अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें।