चंडीगढ़ में बिजली और पानी संकटपूर्ण स्थिति: जनता त्रस्त

चंडीगढ़- चिलचिलाती गर्मी में जब जनता को बिजली और पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब चंडीगढ़ की जनता इन दोनों मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। दिनांक 1 फरवरी 2025 को, विपक्षी दलों और जनता के तीव्र विरोध के बावजूद, चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सदैव लाभकारी रहे बिजली विभाग को निजी कंपनी को हस्तांतरित कर दिया। आश्चर्यजनक रूप से, चंडीगढ़ की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस निर्णय का कोई विरोध नहीं किया।  
निजी कंपनी सीडीपीएल जिसके तकनीकी कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर से लेकर निदेशक तक, विभिन्न राज्यों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर निर्भर है, वह भी चंडीगढ़ की जनता को बिजली संकट से मुक्ति नहीं दिला सके। अघोषित बिजली कटौती, कम वोल्टेज, और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव ने प्रत्येक नागरिक को परेशान कर रखा है। विशेष रूप से बीमार व्यक्तियों, वृद्धजनों और बच्चों की तकलीफें और अधिक बढ़ गई हैं। कभी दोपहर में लंबे समय तक बिजली कटौती, तो कभी रात में अंधेरा—इस भीषण गर्मी में जनता न तो चैन से सो पा रही है और न ही राहत महसूस कर पा रही है।  
हाल ही में हुई मुख्य सचिव की बैठक में कंपनी ने दावा किया था कि उसने बुनियादी ढांचे को उन्नत कर लिया है, किंतु पुराने ट्रांसफार्मरों को बदलने का कार्य अब तक प्रारंभ नहीं हुआ है। यह स्पष्ट रूप से जनता के साथ छल है। मुख्य सचिव को तत्काल इस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसका एमओयू रद्द करना चाहिए।  
बिजली संकट के साथ-साथ, चंडीगढ़ के निवासियों को जलापूर्ति की कमी और दूषित पानी की समस्या ने भी जकड़ लिया है। कई सेक्टरों और मणिमाजरा क्षेत्र में लोग दूषित जलापूर्ति से परेशान हैं। इस भयावह स्थिति में चंडीगढ़ प्रशासन आखिर कब तक चुप्पी साधे रहेगा? ऐसी परिस्थितियों में शहर में किसी भी समय महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।  
चंडीगढ़ की जनता इन समस्याओं से त्रस्त है, किंतु शहर की महापौर महोदया निश्चिंत होकर विश्राम कर रही हैं। न तो उनके पास बिजली और पानी की इन गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए समय है और न ही इस विषय पर बोलने की इच्छा। ठीक ही कहा गया है, "जब रोम जल रहा था, तब नीरो बंसी बजा रहा था।"