किसानों के आगे झुकी डीसी की अकड़ खेतखेत पहुंचने को हुए मजबूर
करनाल, 12 मार्च- भारतीय किसान यूनियन द्वारा डीसी के अड़ियल और तानाशाही रवैये के खिलाफ मुख्यमंत्री का बहिष्कार करने की घोषणा के बाद आखिरकार डीसी की अकड़ टूटी है। यह बात भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और डीसी उत्तम सिंह के धरनास्थल पर आने के बाद कही।
गांव सोहाना के पास रिंग रोड पर सर्विस लेन की मांग को लेकर महीनों से चल रहे किसानों के धरने ने आखिरकार प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। डीसी द्वारा जिन किसानों को पहले मिलने तक का समय नहीं दिया गया, उन्हीं किसानों के बीच अब डीसी को खेत-खेत आकर बातचीत करनी पड़ी। धरना स्थल पर डीसी के साथ घरौंडा के विधायक व हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष भी पहुंचे और किसानों को सर्विस लेन निर्माण का भरोसा दिया।
भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने इसे किसानों के संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि प्रशासन की तानाशाही आखिरकार किसानों की एकता के आगे टूट गई। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले जब किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्या लेकर जिला सचिवालय पहुंचे थे तो डीसी ने उनसे मिलने तक की जरूरत नहीं समझी। घंटों तक किसान भूखे-प्यासे इंतजार करते रहे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठे रहे।
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतन मान और अन्य किसान नेताओं ने पुराने व्यवहार का हवाला देते हुए कहा कि उस दिन डीसी का रवैया पूरी तरह से तानाशाही भरा था, लेकिन जब किसानों का आंदोलन लगातार मजबूत होता गया और धरना खत्म करने से साफ इनकार कर दिया गया, तब प्रशासन को खुद धरना स्थल पर आकर बात करनी पड़ी।
धरना स्थल पर पहुंचे डीसी और विधानसभा अध्यक्ष ने किसानों से बातचीत करते हुए कहा कि रिंग रोड पर सर्विस लेन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करवाने के लिए संबंधित विभागों से बात की जा रही है और जल्द समाधान निकाला जाएगा।
भाकियू जिला प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान ने कहा कि यह किसानों के धैर्य और एकता की जीत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सर्विस लेन का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। किसान अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर काम शुरू होते देखना चाहते हैं।
किसान नेताओं ने यह भी चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने फिर से वादाखिलाफी की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो रोड जाम करने जैसे बड़े कदम भी उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
धरना स्थल पर पहुंचे सैकड़ों किसानों ने कहा कि चल रहा यह आंदोलन किसानों की मजबूरी नहीं बल्कि उनके हक की लड़ाई है। किसानों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही प्रशासन संवाद करता तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।
