महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल थी दादी जानकी राजयोगिनी पूनम दीद
हरियाणा/हिसार: आध्यात्मिक चेतना, सेवा और नारी सशक्तिकरण की सशक्त प्रतीक रहीं दादी जानकी को आज भी दुनिया भर में श्रद्धा और प्रेरणा के साथ याद किया जाता है। प्रजा पिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रमुख स्तंभ रहीं दादी जानकी का जीवन एक ऐसी प्रेरक गाथा है, जिसने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में आध्यात्मिक जागरण की नई रोशनी फैलाई।
चंडीगढ़ के सेक्टर-27 स्थित ग्लोबल डिवाइन लाइट हाउस की राजयोगिनी पूनम दीदी उन्हें स्मरण करते हुए कहती हैं कि “दादी जानकी केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक जीवित ऊर्जा थीं, जो हर आत्मा को उसकी वास्तविक शक्ति का बोध कराती थीं।” उनके अनुसार दादी जी का जीवन इस बात का प्रमाण था कि सच्चा नेतृत्व बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और आत्मबल से जन्म लेता है।
सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) में जन्मी दादी जानकी जी ने बचपन से ही सेवा और आध्यात्मिकता को अपना लक्ष्य बना लिया था। 1937 में जब उन्होंने ईश्वरीय विश्व विद्यालय से जुड़कर अपना जीवन समर्पित किया, तब यह निर्णय समाज की परंपराओं को चुनौती देने वाला था। पूनम दीदी कहती हैं, “उस दौर में महिलाओं के लिए इस प्रकार आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन दादी जी ने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प से हर बाधा को पार किया जा सकता है।”
1951 से 1974 के बीच उन्होंने भारत और विश्वभर में आध्यात्मिक मूल्यों का प्रचार किया। वे उस समय की एकमात्र महिला आध्यात्मिक वक्ता थीं, जिन्होंने पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों को जोड़ते हुए मानवता की एकता का संदेश दिया। 100 से अधिक देशों की यात्रा कर उन्होंने समाज के हर वर्ग तक आध्यात्मिकता का संदेश पहुँचाया। इस संदर्भ में पूनम दीदी कहती हैं, “दादी जी जहां भी गईं, वहां उन्होंने लोगों के दिलों को जोड़ा, न कि केवल विचारों को।”
1974 में लंदन में ग्लोबल को-ऑपरेशन हाउस की स्थापना उनके प्रयासों का ही परिणाम थी। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कार्य किया गया। आगे चलकर वे संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका बनीं और विश्वभर में सेवाकार्यों की जिम्मेदारी संभाली। पूनम दीदी के शब्दों में, “दादी जानकी का नेतृत्व अनुशासन, करुणा और सादगी का अद्भुत संगम था।”
दादी जानकी जी ने शिक्षा और मूल्यों के विकास को विशेष महत्व दिया। ‘लिविंग वैल्यूज एजुकेशनल इनिशिएटिव’ के माध्यम से उन्होंने 60 से अधिक देशों में बच्चों को नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा से जोड़ा। यूनिसेफ से जुड़े शिक्षाविदों के सहयोग से शुरू हुई यह पहल आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुकी है। पूनम दीदी कहती हैं, “दादी जी मानती थीं कि अगर बचपन में ही सही संस्कार मिल जाएं, तो समाज अपने आप बदल सकता है।”
1995 में बीजिंग में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व महिला सम्मेलन में उन्होंने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इसके अलावा “Sharing Our Values for a Better World” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने राजनीति, विज्ञान, शिक्षा और स्वास्थ्य में मूल्यों के समावेश का संदेश दिया। ‘Young Women of Wisdom’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने युवा महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनकी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भी अत्यंत प्रभावशाली रही। सैन फ्रांसिस्को में “State of the World Forum” में भागीदारी, सिंगापुर में 5000 लोगों के बीच ‘Companion of God’ के चीनी संस्करण का विमोचन, और यूके में ‘Inter-Religious Understanding and Co-operation’ कार्यक्रम की मेजबानी—ये सभी उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाते हैं। वे ‘World Congress of Faith’ की उपसभापति भी रहीं और ऑक्सफोर्ड के निकट ग्लोबल रिट्रीट सेंटर की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दादी जानकी जी का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम भी था। उन्होंने महिलाओं में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास किया। पूनम दीदी कहती हैं, “दादी जी हर महिला को यह एहसास दिलाती थीं कि वह किसी से कम नहीं, बल्कि अपने भीतर असीम शक्तियों का भंडार रखती है।”
उनकी दृष्टि में सच्चा विकास वही है जिसमें मनुष्य का भावनात्मक, आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान हो। उन्होंने पूरी दुनिया में प्रेम, शांति और सहयोग का संदेश फैलाया और यह सिखाया कि जीवन का असली उद्देश्य केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए जीना है।
आज भी जब दादी जानकी जी को याद किया जाता है, तो उनका जीवन एक प्रेरणा बनकर सामने आता है। पूनम दीदी के शब्दों में, “दादी जानकी जी ने हमें सिखाया कि अगर मन शांत और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो असंभव भी संभव बन जाता है।”
उनकी यही शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों के जीवन को दिशा दे रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उज्ज्वल मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।
