प्रवास में रहते हुए भी मातृभूमि से जुड़ाव मेजर मुनीश चौहान
मोहाली:- डॉ. गुरिंदर पाल सिंह जोसन, जो अमेरिका में रहते हैं और सारागढ़ी फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष हैं, ने शहीदों की वीरता और बलिदान की गाथाओं को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने अब तक 16 पुस्तकों की रचना की है, जिनमें से एक किताब पर बॉलीवुड की चर्चित फिल्म केसरी भी बनी है। डॉ. जोसन ने कहा कि उनका उद्देश्य है कि भारत के इतिहास और पंजाबी शहीदों की गौरवगाथा विश्वभर में सम्मान पाए।
*भारत यात्रा पर ब्रिटिश आर्मी का दल**
हाल ही में ब्रिटिश आर्मी का एक प्रतिनिधिमंडल “इंडिया हेरिटेज विज़िट 2025” कार्यक्रम के तहत भारत आया। इस दल का नेतृत्व मेजर डॉ. मुनीश चौहान ने किया। प्रतिनिधिमंडल में मेजर जनरल जॉन केंडल, लेफ्टिनेंट कर्नल एलिस आर्चर, मेजर हिना मर्जरिया, कैप्टन कमलजीत संधू, स्क्वाड्रन लीडर मनदीप कौर, सिमरनजीत सिंह, सरबजीत सिंह, अनिकेत शाह, रंजीव सांगवान और जसपिंदर सिंह शामिल थे। विज़िट चार चरणों में विभाजित थी, जिसमें दल सबसे पहले पंजाब पहुंचा। यहाँ वे विभिन्न ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर गए, जहाँ उन्हें अपार सम्मान और ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त हुई।
*शहीद परिवार से विशेष भेंट*
मोहाली में दल के सदस्यों ने एक ऐसे परिवार से भेंट की जिनके पूर्वज द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए थे। परिवार के सदस्यों ने बहादुरी के पदक और संबंधित दस्तावेज ब्रिटिश प्रतिनिधियों को दिखाए। इस अवसर पर सहायक एडवोकेट जनरल सी. एल. पवार ने मेजर चौहान और अन्य अधिकारियों का स्वागत किया और उन्हें “ब्रिटिश आर्मी इंडियन हेरिटेज विज़िट 2025” का स्मृति चिन्ह भेंट किया।मेजर चौहान ने कहा, “शहीद ही किसी कौम की वास्तविक पूंजी होते हैं।
*”रानी के अंगरक्षक रहे सरबजीत और सिमरजीत सिंह मान**
इंग्लैंड की सेना में सेवा दे रहे सरबजीत सिंह और सिमरजीत सिंह मान भारतीय मूल के पंजाबी हैं। वे पहले सिख अधिकारी हैं जिन्होंने ब्रिटेन की महारानी के अंगरक्षक के रूप में सेवा की है। उन्होंने बताया कि पंजाब आकर उन्हें अपार स्नेह और सम्मान मिला है, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।उनके अनुसार, पंजाब की जनता का यह प्यार उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
**प्रतिनिधि मंडल का सम्मान*
इस अवसर पर मोहाली से प्रकाशित हिंदी-पंजाबी दैनिक के एम.डी. सुरिंदर पाल सिंह झल्ल और दविंदर सिंह, संपादक-इन-चीफ, ने भी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। ब्रिटिश आर्मी के अधिकारियों द्वारा उन्हें भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
**भारतीय गौरव का प्रतीक**
यह मुलाकात मोहाली चंडीगढ़ में हुई यह मुलाकात भारतीय गौरव और प्रवासी भारतीयों की मातृभूमि के प्रति निष्ठा का प्रतीक रही। सीमित समय में हुई यह बातचीत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। विदेशी धरती पर सेवा करते हुए भी अपने देश के प्रति समर्पण इस प्रतिनिधिमंडल के हर सदस्य में स्पष्ट दिखाई दिया।
